बीसलपुर। ग्राम पंचायत बौनी की पहचान बैरियों के गांव के नाम से है। वैसे तो सांप के डसने के बाद अस्पताल ले जाकर ही इलाज कराने को प्राथमिकता देनी चाहिए। मगर इस गांव में सांप के डसने के बाद इलाज का दावा किया जाता है। दूर-दराज से लोग यहां पहुंचते हैं। नागपंचमी के दिन लगने वाले विशाल मेले में तो कई जिलों से लोग शामिल होते हैं। यही इस गांव को एक अलग पहचान देता है। पंचायत चुनाव के बाद ग्रामीण नवनिर्वाचित प्रधान से विकास की उम्मीद लगाए हैं। प्रधान ने भी पीएचसी, इंटर कॉलेज और ट्यूबवेल बनवाने को प्राथमिकता में शामिल किया है।
तहसील बीसलपुर से आठ किलोमीटर दूर स्थित पांच हजार आबादी की ग्राम पंचायत बौनी में 1751 मतदाता है। गांव के 70 प्रतिशत लोग साक्षर हैं। इस गांव को बैरियों के गांव के नाम से पहचाना जाता है। कई दशकों से गांव की यही पहचान बनी हुई है। इसके पीछे ग्रामीण ये वजह बताते हैं कि इस पूरे जिले में यही एक गांव ऐसा है, जिसमें सांप के डसने वाले मरीज को ठीक करने वाले रहते हैं। पहले इनकी संख्या सौ से अधिक थी। कई की मौत भी हो चुकी है। नागपंचमी पर हर साल मेला लगता है। इसमें जिले के विभिन्न गांवों के अलावा बरेली, शाहजहांपुर और बदायूं से भी लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। इस बार पंचायत चुनाव में गांव की ही किरन गोस्वामी प्रधान चुनी गई है। गांव में सड़क, नाली खड़ंजा के साथ ही सबसे बड़ी समस्या स्वास्थ्य सुविधाएं न होना है। पिछले दिनों ही बुखार से दस से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं। शिक्षा को लेकर भी सीमित संसाधन है। ऐसे में ग्रामीणों की उम्मीदों के साथ ही नवनिर्वाचित प्रधान ने भी इनका समाधान कराना प्राथमिकता में बताया।
ग्राम पंचायत बौनी
5000 आबादी।
1751 मतदाता।
70 प्रतिशत साक्षर।
गांव की समस्याएं
- स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव।
- कच्चे रास्ते, नाली और खड़ंजे।
- ट्यूबवेल न होना,
- बिजली
प्रधान की प्राथमिकताएं
- पीएचसी की स्थापना।
- ट्यूबवेल का निर्माण।
- इंटर कॉलेज।
-कच्ची सड़कों को पक्का कराना।
- पात्रों को पेंशन, आवास समेत अन्य योजनाओं का लाभ दिलाना।
बीमार होने के बाद इलाज के कोई इंतजाम गांव में नहीं है। बीसलपुर तक जाना पड़ता है। वहां भी सही इलाज नहीं मिल पाता। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्र बन जाए तो राहत होगी। - जितेंद्र गोस्वामी, ग्रामीण
अधिकांश ग्रामीण खेती करते हैं। खेतिहर क्षेत्र में राजकीय ट्यूबवेल न होने से दिक्कत आती है। अगर इसका इंतजाम करा दिया जाए तो किसानों को काफी राहत मिलेगी। - अशोक कुमार, ग्रामीण
ग्राम पंचायत के मजरा मलूकापुर तक जाने वाली दो किलोमीटर लंबी सड़क कच्ची है। बारिश के दिनों में दलदल में तब्दील हो जाती है। इसे पक्का कराया जाना चाहिए। - प्रदीप पांडेय, ग्रामीण
गांव की गलियों में बिजली के पोल पर स्ट्रीट लाइट नहीं है। रात में पूरे गांव में अंधेरा पसरा रहता है। रास्ते जर्जर होने की वजह से हादसे का डर रहता है। इनका समाधान होना चाहिए। - ज्ञानेंद्र कुमार, ग्रामीण
कराएं जाएंगे जरूरी काम
गांव के लोगों ने मुझ पर जो विश्वास जताया है, उसे बिना भेदभाव विकास कार्य कराकर निभाऊंगी। कच्ची सड़क पक्की कराई जाएंगी। पात्रों को योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। पीएचसी और ट्यूबवेल को प्राथमिकता पर कराएंगे। कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। - किरन गोस्वामी, प्रधान