पूरनपुर। इंडो-नेपाल बॉर्डर पर पांच मार्च को नेपाल पुलिस की गोली से घायल युवक की इलाज के दौरान लखनऊ में मौत हो गई। सोमवार देर रात शव उसके गांव पहुंचा तो कोहराम मच गया। देर रात तक अफसर गांव में जमे रहे। परिवार को ढांढस बंधाया। दूसरे दिन पुलिस बल की मौजूदगी में अंतिम संस्कार हुआ। तब जाकर अधिकारियों ने राहत की सांस ली। हालांकि मंगलवार को भी सीमा पर आवागमन बंद रहा।
हजारा थाना क्षेत्र के गांव टिल्ला नंबर चार निवासी 22 वर्षीय गोविंदा, गुरमेज सिंह (20), पप्पू और रेशम सिंह पांच मार्च को नेपाल गए थे। नेपाल क्षेत्र के बॉर्डर पर विवाद के दौरान नेपाल पुलिस की गोली से गोविंदा की मौके पर ही मौत हो गई थी। जबकि गुरमेज गोली लगने से घायल हुआ था। अन्य साथी बच गए थे।
परिवार के लोग नेपाल पुलिस पर हत्या का आरोप लगा रहे थे। नेपाल पुलिस के अनुसार युवकों पर तस्करी के आरोप पर कार्रवाई की गई थी। इसे लेकर कई दिनों तक बॉर्डर पर तनाव बना रहा था। घायल गुरमेज सिंह की लखनऊ के अस्पताल में इलाज के दौरान रविवार रात मौत हो गई थी। सोमवार को लखनऊ पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया था। शव घर पहुंचने का पता लगते ही रात को एसडीएम राजेंद्र प्रसाद, सीओ लल्लन सिंह पुलिस बल के साथ गांव पहुंच गए थे। परिवार वालों और ग्रामीणों से बातचीत कर ढांढस बंधाया। देर रात दो बजे शव गांव पहुंचा तो कोहराम मच गया। हालांकि किसी तरह का विरोध या विवाद सामने नहीं आया। इस पर अधिकारी वापस लौट गए। मंगलवार सुबह फिर पुलिस बल गांव पहुंच गया। परिवार वालों ने शव का गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया।
एसडीएम ने बताया कि क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनी हुई है। हजारा थाने की पुलिस को मंगलवार को गांव में तैनात था। एसओ हजारा उमेश सोलंकी ने बताया कि शव का अंतिम संस्कार परिजन ने कर दिया है। कोई विरोध नहीं है। फिलहाल सीमा पर आवाजाही बंद रही।