पीलीभीत। ग्रामीण इलाकों को विकसित करने और रोजगार मुहैया कराने के मकसद से शुरू की गई मनरेगा में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की दीमक लग चुकी है। पूर्व में सामने आए घोटालों के बाद ब्लॉक स्तरों पर निर्माण सामग्री की सप्लाई कर रही 2026 फर्म में अधिकांश नियम के विरूद्ध तरीके से संचालित हैं। कुछ अधिकारियों की शह पर लंबे समय से गोलमाल चला रहा है। मगर अब डीएम के निर्देश पर कराए जा रहे सत्यापन में फर्म की गुणवत्ता से लेकर अफसरों की निगरानी की भी पोल खुल गई है। 1100 से अधिक फर्म के पास तो जीएसटी पंजीकरण ही नहीं मिला है। जिनके जीएसटी पंजीकरण है, उनमें भी अधिकांश के कागजात नहीं मिल पा रहे हैं। अब इन सभी फर्म को डीएम ने रडार पर लिया है।
अभी तक मनरेगा में जॉबकार्ड धारकों से वसूली, दूसरे गांवों से श्रमिक बुलाकर काम कराने, फर्जी मस्टररोल बनाने जैसी आम शिकायतें थी। इन पर भी प्रशासन की सख्ती सिर्फ जांच कराने तक सीमित रहती थी। मगर बीते कुछ सालों से फर्म बनाकर करोड़ों का घोटाला करने के मामले उजागर होना शुरू हो गए थे। जनपद में सात ब्लॉकों पर कुल 2026 फर्म से निर्माण सामग्री की सप्लाई कराई जा रही है। कई फर्म जिम्मेदारों की होने का भी आरोप लगाया गया था। इस पर डीएम पुलकित खरे ने समस्त 2026 फर्म का सत्यापन करने की जिम्मेदारी डीसी मनरेगा मृणाल सिंह को दी थी। उनकी तरफ से जांच अभी चल रही है। 2026 में से 1500 फर्मों के बारे में पड़ताल कराई जा चुकी है। इसमें चौंकाने वाले तथ्य निकलकर सामने आए। 2015 से फर्म का जीएसटी पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया था। पहले से काम करती चली आ रही फर्म को भी इसके तहत पंजीकरण कराने के निर्देश दे दिए थे। तभी वह निर्माण सामग्री की सप्लाई करने योग्य बन पाती। मगर अभी भी 1100 फर्म ऐसी पाई गई, जिनका जीएसटी पंजीकरण ही नहीं है। ऐसे में उनसे लेनदेन किस तरह से चल रहा था अब इसकी भी छानबीन करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्रवाई करने के लिए निर्णय लेने से पूर्व नियमावली भी चेक कराई जा रही है। सिर्फ 400 फर्म के पंजीकरण निकले हैं। उसमें भी 80 फर्म ऐसी हैं, जिनके काफी प्रयास के बाद भी ब्लॉकों से अभिलेख मुहैया नहीं कराए जा सके हैं। ऐसे में उनकी भूमिका भी संदेहास्पद बनी हुई है। फिलहाल इतनी तस्वीर साफ हो गई है कि गोलमाल कम नहीं है।
फर्मों का सत्यापन पूरा करने को जनवरी अंत तक का दिया समय
समस्त फर्मों का सत्यापन डीसी मनरेगा से कराया जा रहा है। पहले उन्होंने जांच के लिए कुछ समय मांगा था। इस पर डीएम ने एक सप्ताह का समय दे भी दिया था। बीते कुछ दिनों से डीसी मनरेगा की तबीयत खराब चल रही है। ऐसे में अब उन्हें सभी फर्मों का सत्यापन पूरा करने के लिए कुछ और समय दिया गया है। जनवरी के अंत तक सभी फर्मों की विस्तृत जांच करके रिपोर्ट मांगी है।
सीडीओ द्वारा भेज दी गई अधूरी पत्रावली, डीएम ने लौटाई
फर्मों की जांच को लेकर सीडीओ श्रीनिवास मिश्र की ओर से बीते दिनों डीएम को पत्रावली बनाकर भेज दी गई थी। मगर वह अधूरी थी। कई बिंदुओं पर तस्वीर पूरी तरह से स्पष्ट नहीं की गई थी। इस पर आपत्ति जताते हुए डीएम ने पत्रावली को वापस कर दिया है। जीएसटी पंजीकरण के बाद भी 80 फर्म के अभिलेख नहीं थे। अभिलेख जुटाकर स्थिति स्पष्ट करने को सात दिन का समय दिया है। इसके लिए नोटिस भी जारी करने के निर्देश दिए हैं।
कई जिम्मेदारों की बढ़ी धड़कनें, सताया कार्रवाई का डर
फर्मों की कराई जा रही जांच में निकलकर आ रही कमियों के बाद अब तक निगाह फेरते और संरक्षण देते आए जिम्मेदारों की धड़कनें बढ़ गई है। डीएम ने अवैध और नियम विरुद्ध तरीके से काम कर रही फर्मों पर कार्रवाई की तस्वीर पहले ही साफ कर दी है। संबंधित फर्म के संचालक पर एफआईआर की बात कह चुके हैं। इसके अलावा संबंधित ब्लॉक के अधिकारियों पर भी गाज गिरना तय है। ऐसे में अब कई अधिकारी-कर्मचारियों को खुद पर कार्रवाई का डर सता रहा है।
तीन फर्म पहले ही पकड़ी जा चुकीं, सात कर्मचारी हो चुके बर्खास्त
छह माह के भीतर मनरेगा में दो बड़े घोटाले सामने आ चुके हैं। अगस्त 2020 में अमरिया के एपीओ अजय कुमार द्वारा निजी फर्म और फर्जी मस्टररोल बनाकर किया गया करोड़ों का घोटाला पकड़ा गया था। 27 अगस्त को एपीओ और तीन रोजगार सेवकों को बर्खास्त कर जेल भेजा गया था। इसके बाद दिसंबर अंत में माधोटांडा के रोजगार सेवक इस्लामुद्दीन खां, पूरनपुर के दो तकनीकी सहायक राजीव भारती और भगवान सिंह की फर्म भी पकड़ी गई थी। इन तीनों को भी बर्खास्त कर रिपोर्ट दर्ज कराई जा चुकी है। हालांकि अभी इनकी गिरफ्तारी पुलिस नहीं कर सकी है।
गड़बड़ी पर नहीं मिलेगी कोई छूट, कार्रवाई तय
जनपद भर में काम कर रही फर्मों की जांच चल रही है। 1100 फर्म बिना जीएसटी पंजीकृत निकली है। 400 फर्म का पंजीकरण है, मगर इसमें से 80 के कागजात नहीं जुटाए जा सके हैं। इस पर नोटिस जारी करने को कहा है। गंभीरता से पड़ताल करा रहे हैं। नियमावली भी चेक कराई जा रही है। गड़बड़ी पर कार्रवाई तय है। - पुलकित खरे, डीएम