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धान सुखाने के चक्कर में मंडी में गुजर-बसर कर रहे अन्नदाता

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पीलीभीत। एक अक्तूबर से शुरू हुई सरकारी धान खरीद में सेंधमारी के लिए हर साल की तरह इस साल भी बिचौलियों ने राइस मिलर्स, आढ़ती और खाद्य विभाग के अफसरों की सांठगांठ से बड़ा नेटवर्क बिछाया है। किसानों से औने-पौने दामों पर धान की खरीद राइस मिलों पर होती है, मगर बड़े और मझोले किसानों की खतौनी, आधार कार्ड और चेक जमा कराकर उस खरीद को सरकारी केंद्रों पर दर्शाया जाता है। नमी बताकर लौटाए गए किसान मंडी में ही धान सुखाने के लिए तीन-चार दिन रुकने को मजबूर हैं।
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जनपद भर में 10 एजेंसियों के 165 क्रय केंद्रों पर धान की खरीद कराई जा रही है। डीएम पुलकित खरे ने इस बार धान खरीद में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सख्ती कर रखी है। मगर, खाद्य विभाग के अलावा तहसीलों से जुड़े अफसरों की सांठगांठ से सरकारी धान खरीद में माफिया, बिचौलिए और राइस मिलर्स का गठजोड़ पूरी तरह हावी है।
हालांकि डीएम की सख्ती का असर यह है कि धान खरीद में अभी उतनी गड़बड़ी नहीं हो पा रही है, जितनी कि हर साल होती है। शहरी इलाकों के क्रय केंद्रों पर धान की खरीद कुछ बढ़ने लगी हो, मगर ग्रामीण इलाकों में धान की खरीद न के बराबर हो रही है क्योंकि वहां धान में नमी अधिक होने की बात कहकर किसानों को लौटा दिया जाता है। वही किसान आढ़त पर अपना धान 1350 रुपये से 1450 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से सीधे राईस मिल में तुलवा देता है। उसी किसान के अभिलेख क्रय केंद्रों पर भेजकर उसे सरकारी खरीद में दर्शाया जाता है। क्रय केंद्रों पर किसान से सरकारी मानक 17 प्रतिशत नमी बताकर धान नहीं खरीदते। वही धान राईस मिल में खरीदवाकर क्रय केंद्रों से खरीद होना दर्शाने में क्रय केंद्र प्रभारियों को पुरानी महारथ हासिल है। अमर उजाला ने शनिवार को धान खरीद की हकीकत परखी तो नवीन मंडी समिति में क्रय केंद्रों पर हालात कुछ ठीक थे, मगर ग्रामीण इलाकों में किसानों की दिक्कत कम नहीं दिखीं।
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सुखाने और छलना लगाने पर हो रही खरीद
पूरनपुर। सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचना किसानों के लिए मुसीबत से कम नहीं है। यहां किसानों को ज्यादा नमी समेत अन्य मानकों के नाम पर धान बेचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई दिन तक सुखाने और छलना लगाने के बाद बमुश्किल धान की तौल हो पा रही है। प्रतिदिन तीन सौ क्विंटल धान खरीद की बाध्यता से भी किसान परेशान हैं। अधिकांश खरीद केंद्रों पर एक कांटा लगा है। उस पर भी राइस मिलर्स के कर्मचारी रहते हैं।
धान की खरीद पूरी पारदर्शिता के साथ हो रही है। किसानों से सरकारी क्रय केंद्रों पर ही धान बेचने की अपील की है। किसी तरह की गड़बड़ी या फिर कमी सामने आती है तो सख्ती की जाएगी। - डॉ. अविनाश झा, डिप्टी आरएमओ
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