पीलीभीत। अवैध कॉलोनियों में नई कंपाउंडिंग योजना से राहत पाने की जुगत भिड़ाने वाले भवन मालिकों और बिल्डरों को हाईकोर्ट के नए फैसले से तगड़ा झटका लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार की नई योजना को लागू करने पर रोक लगा दी है। उच्च न्यायालय के इस निर्णय से शहर की करीब 25 अवैध कॉलोनियों के वैध होने का रास्ता फिलहाल बंद हो गया है। अब यह अवैध कॉलोनियां फिलहाल कानूनी रूप से वैध नहीं हो पाएंगी। उच्च न्यायालय के नए फैसले से प्रॉपर्टी डीलर्स में भी खलबली मच गई है।
शहर को सुनियोजित ढंग से बसाने को लेकर पहले मास्टर प्लान को वर्ष 1998 में शासन द्वारा स्वीकृति दी गई थी। शहर में यह मास्टर प्लान वर्ष 2011 की नगरीय जनसंख्या 2,10,000 को आधार मानते हुए तैयार किया गया था। प्रथम मास्टर प्लान में शहर को सुनियोजित तरीके से बसाने में विभिन्न काम कराने के लिए 1557 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित की गई थी, लेकिन अफसरों की प्रापर्टी कारोबारियों से सांठगांठ होने से आमजन को सुविधाएं मुहैया कराने और शहर को सुनियोजित ढंग से विकसित करने की शासन की योजना पर पलीता लगता गया। मास्टर प्लान की इस कदर धज्जियां उड़ी कि हरित क्षेत्रों में भी अनाधिकृत प्रॉपर्टी कारोबारियों ने जमकर निर्माण कार्य कर दिए। इन प्रॉपर्टी कारोबारियों को राजनीतिक दलों के सफेदपोशों का संरक्षण मिला। वक्फ की जमीनों से लेकर तमाम सरकारी जमीनों पर भू-माफियाओं ने अनाधिकृत कॉलोनियां बसा दीं। कई दशक पहले ही सरकारी जमीनों पर भी कॉलोनियां काटने का सिलसिला तेज हो गया था। नतीजतन शहर अवैध कॉलोनियों के मकड़जाल में फंसता चला गया। बीते दिनों शासन ने उन अवैध कॉलोनियों और निर्माण जो महायोजना के भू-उपयोग के अनुसार जमीन पर बसे हैं, उनको वैध करने का मौका देते हुए नई कंपाउंडिंग योजना शुरू की थी। इसका फायदा उठाकर कॉलोनाइजर और जमीन खरीदने वाले राहत पाने की जद्दोजहद में बाकी किसानों की भी जमीन औने-पौने दामों में खरीदने में लग गए, ताकि आगे भी अवैध कॉलोनियां बसती रहें और उनकी मोटी कमाई होती रहे। मगर, हाईकोर्ट के नए फैसले से काली कमाई करने वाले प्रापर्टी कारोबारियों की उम्मीदों पर सरकार के नए निर्णय लेने तक फिलहाल तो पानी फिर गया। शहर में टनकपुर हाईवे, माधोटांडा रोड, बिलगवां रोड, गौरीशंकर मंदिर रोड, बीसलपुर रोड से लेकर शहर के भीतरी इलाकों में भी इस तरह से अवैध कॉलोनियों की भरमार है। हाईकोर्ट के नए निर्णय से यह कॉलोनियां फिलहाल वैध नहीं हो पाएंगी। प्रशासन को नए शासनादेश के आने का इंतजार है, वहीं शहर के अंदर और आस-पास गांवों में अनाधिकृत तरीके से किसानों की जमीनों की औने-पौने दामों में खरीद-फरोख्त करके रियल एस्टेट रेग्लेटिंग एक्ट अधिनियम (रेरा) में गैर पंजीकृत प्रापर्टी डीलर्स हाईकोर्ट के नए फैसले से परेशान हैं। अगर सरकार ने सख्ती बरती तो उनके अवैध कारोबार पर ब्रेक लग सकता है।
19 कॉलोनियों को प्रशासन ने भेजे थे नोटिस
विनियमित क्षेत्र की ओर से भी शहर में अवैध तरीके से बसी 19 कॉलोनियों पर कार्रवाई की शुरूआत की थी। शहर और आसपास विकसित हो रही इन कॉलोनिनयों को नोटिस भी भेजा गया। मगर कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। हालांकि वह अलग बात है कि अधिकांश अवैध कॉलोनियां विनियमित क्षेत्र के इंजीनियर और अफसरों की सांठगांठ से बनाई गईं। अवैध कॉलोनियां बनाने में अफसरों की मौन स्वीकृति रही। अनाधिकृत कॉलोनियां बनाने में राजनीतिक दलों से जुड़े पदाधिकारी भी शामिल रहे हैं।
नई कंपाउंडिंग में योजना था यह प्रावधान
प्रमुख सचिव आवास की ओर से जारी शासनादेश के मुताबिक नई शमन योजना 21 जुलाई से छह महीने यानी 20 जनवरी 2021 तक लागू होनी थी। उसमें लाभार्थी अपनी कॉलोनी को वैध कराने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन कर सकता था। विकास प्राधिकरण या विनियमित क्षेत्र को तीन महीने के भीतर प्रत्येक प्रकरण का निपटारा करने का प्रावधान था। अगर नई शमन योजना में अवैध कॉलोनियों को वैध किया जाता तो 300 वर्ग मीटर तक के भवनों में 20 फीसदी अतिरिक्त निर्माण सशर्त शमनीय होता। निर्माणकर्ता को निर्धारित कंपाउंड शुल्क अदा करके उसे वैध कराना पड़ता। विनियमित क्षेत्र को कैंप लगाकर आवेदनों का निस्तारण कराने के भी निर्देश दिए थे। मगर, कोरोना में लॉकडाउन लगने से नई शमन योजना कारगर ढंग से लागू नहीं हो सकी।
ऐसे तय किया गया था शमन शुल्क
आवासीय, ग्रुप हाउसिंग, बहुमंजिला भवन के लिए भूमि मूल्य का 50 प्रतिशत।
व्यावसायिक भवनों के लिए भूमि मूल्य का 100 फीसदी।
कार्यालय के लिए बने भवनों में भूमि मूल्य का 75 फीसदी।
सामुदायिक सुविधाओं वालेे भवन में भूमि मूल्य का 25 प्रतिशत।
एफएआर के प्रकरणों में आवासीय भवनों के लिए 200 रुपये वर्ग मीटर, व्यावसायिक भवनों के लिए 400 रुपये, कार्यालय के लिए 300 रुपये और सामुदायिक भवनों के लिए 100 रुपये वर्ग मीटर।
बेसमेंट के प्रकरणों में आवासीय भवनों के लिए 200 रुपये प्रति वर्गमीटर, व्यवसायिक भवनों के लिए 400 रुपये, कार्यालय के लिए 300 रुपये और सामुदायिक भवनों के लिए 100 रुपये वर्ग मीटर।
यदि भूखंड मिलाए गए हो तो आवासीय भूमि के जिलए भूमि मूल्य का एक प्रतिशत, व्यावसायिक के लिए जमीन मूल्य का दो प्रतिशत, कार्यालय के लिए जमीन मूल्य का 1.5 प्रतिशत।
नई कंपाउंडिंग योजना को लेकर अभी तक सिर्फ दो या तीन आवेदन ही आए थे। उनमें भी कोई निस्तारण नहीं हो सका था। उच्च न्यायालय द्वारा नई शमन योजना लागू करने पर रोक लगाने से जुड़ा आदेश अभी प्राप्त नहीं हुआ है। शासनादेश मिलने पर उसका पालन कराया जाएगा। - अरुण कुमार सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट
शहर के ब्रहमचारी घाट पर की जा रही प्लाटिंग।- फोटो : PILIBHIT