पीलीभीत। नगर पालिका परिषद की बोर्ड बैठक में टैक्स बढ़ोत्तरी को लेकर जमकर हंगामा हुआ। इससे पूर्व बैठक के मुख्य बिंदुओं पर चर्चा होती पालिकाध्यक्ष विमला जायसवाल सदन से उठकर चली गईं। पथ प्रकाश और जलकल कर्मचारियों को मानदेय न मिलने का मामला भी सदन में रखा गया, लेकिन कोई प्रस्ताव पास नहीं हो सका। हालांकि बाद में लाइसेंस शुल्क का प्रस्ताव पारित होने की बात कही गई।
पालिका सभागार में सोमवार शाम पालिकाध्यक्ष विमला जायसवाल की अध्यक्षता में बोर्ड बैठक हुई। प्रभारी ईओ/ एसडीएम सदर वंदना त्रिवेदी के न आने के चलते बैठक करीब 20 मिनट देरी से शुरू हो सकी। एई दिनेश राजपूत ने बैठक की कार्रवाई को पढ़कर सुनाया। उन्होंने पालिका की आय बढ़ाने के लिए अलग-अलग मदों में वार्षिक लाइसेंस शुल्क में बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव रखा। जब प्रस्तावित शुल्क की बात आई तो सदस्य देवी सिंह ने कहा कि गजट के अनुसार एक ही संस्थान से व्यावसायिक शुल्क और प्रॉपर्टी शुल्क लिया जा रहा है, जो पूर्णतया गलत है। इस पर काफी देर तक बहस चलती रही। सदस्य संजीव सक्सेना ने भी टैक्स बढ़ोतरी पर अपनी बात रखी, लेकिन हंगामे के चलते कार्रवाई जहां की तहां रुकी रही। हंगामे बैठक के प्रस्तावित एजेंडे के किसी भी बिंदु पर चर्चा नहीं हो सकी। सदस्य पुष्पा उपाध्याय ने प्रकाश और जलकल अनुभाग के कर्मचारियों को मानदेय छह माह से न मिलने की बात कही। इस बीच कर्मचारी भी आ गए और अपनी समस्या को रखा। पालिकाध्यक्ष कुछ कह पाती इससे पूर्व पुन: शोर शराबा होने लगा। इसके बाद पालिकाध्यक्ष बैठक को बीच में ही छोड़कर चली गई। बैठक में कोई प्रस्ताव पास नहीं किया गया, हालांकि बाद में प्रस्तावित लाइसेंस शुल्क का प्रस्ताव पारित होने की बात कही गई है। इस मौके पर भीम सिंह चौहान, जगन्नाथ प्यारे, महेंद्रपाल, अवतार सिंह समेत कई सदस्य और पालिका कर्मी मौजूद रहे।
बैठक में प्रस्तावित लाइसेंस शुल्क का प्रस्ताव पास हो गया है। कुछ सदस्य आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के मानदेय को लेकर शोर शराबा कर रहे थे, जबकि उनका मानदेय ठेकेदार द्वारा दिया जाना है। - विमला जायसवाल, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद