पीलीभीत। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में राजस्व गांव के एलजी कोड की तहसीलों से सही मैपिंग न होने, बैंकों के दूसरी बैंक में समायोजित होने, आईएफएससी और बैंक अकाउंट में संशोधन हो जाने, रकबा कम फीड होने से तमाम किसान योजना से वंचित हैं। नाम मिसमैच होने की वजह से भी कई पात्र किसानों का भुगतान रोक दिया गया। ये कमियां शासन में हुई समीक्षा में पाई गई हैं। इसके सुधार के लिए शासन की ओर से प्रस्ताव मांगे गए हैं।
किसान सम्मान निधी योजना शुरू होने पर किसानों के डाटा फीडिंग कार्य तेजी के साथ हुआ। सरकार की मंशा थी कि किसानों को तोहफे के रूप में जल्द सम्मान निधि का लाभ दिया जाए। इस कार्य में कई विभागों के कर्मचारी लगाए गए थे, जिनमें अधिकांश अनट्रेंड थे। इससे उनके स्तर से डाटा फीडिंग में बड़ी चूक हुई। इसकी पोल शासन स्तर पर हुई समीक्षा में पोल खुली। जिन राजस्व गांव की मैपिंग सही नहीं हुई थी शासन ने वहां की तहसीलों से प्रस्ताव प्राप्त कर सही मैपिंग करानेे और एलजी कोड आवंटित होने से छूटे राजस्व गांवों की तहसीलवार सूची उपलब्ध कराने को कहा है। उप कृषि निदेशक यशराज सिंह ने बताया कि उच्च स्तर पर लिए गए निर्णय के अनुसार तहसीलों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। ताकि किसानों का डाटा संशोधित किया जा सके। यह भी बताया कि कई ऐसे किसान हैं जिनका आधार नंबर किसी अन्य के बैंक अकाउंट के साथ फीड हो गया है। उनका वास्तविक खाता नंबर अन्य किसान के आधार नंबर के साथ लिंक हो गया है। इससे सही किसानों के खाते में धनराशि अंतरित नहीं हो सकी है। इसकी डिटेल जुटाई जा रही है।
गड़बड़ी की एक वजह यह भी
कृषि विभाग के अधिकारी मान रहे हैं कि योजना लागू होने पर बड़ी संख्या में किसानों ने फार्म भरे। किसी ने प्रधान तो किसी ने लेखपाल को फार्म दे दिया। इनमें तमाम जमा ही नहीं हुए होंगे। इसके अलावा फीडिंग के समय बैंक का नाम, किसान का नाम, खाता संख्या, आधार कार्ड संख्या आदि में खामियां भी रहीं। चूंकि पब्लिक फाइनेंसियल मैनेजमेंट सिस्टम पीएफएमएस के जरिये रकम सीधे बैंक खाते में जा रही है। फार्म में कोई भी त्रुटि होने पर सिस्टम उसे रिजेक्ट कर देता है।