पीलीभीत। जिले का जलस्तर साल दर साल गिरता जा रहा है। वजह है शहर के अधिकतर घरों और औद्योगिक क्षेत्रों में सबमर्सिबल पंपों से पानी का अंधाधुंध दोहन। नगरपालिका के पास पानी की इस शाहखर्ची पर लगाम लगाने का कोई फार्मूला नहीं है, लेकिन अब इस पर लगाम लगने वाली है। सरकार जल्द ही सबमर्सिबल पंप लगाने पर लाइसेंस लेना अनिवार्य करने जा रही है और यह लाइसेंस तब मिलेगा, जब संबंधित भवन में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया हो।
शहर में सबमर्सिबल पंपों से होता है पानी का दोहन
जलकल विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो ढाई लाख की आबादी वाले इस शहर में करीब 14 हजार उपभोक्ता हैं। पालिका के टैक्स अनुभाग के मुताबिक करीब 35 कार्मिशियल उपभोक्ता है, जिसमें अस्पताल, नर्सिंगहोम और होटल आते हैं। इसके विपरीत इनकी संख्या काफी अधिक है जो सबमर्सिबल पंपों से अंधाधुंध पानी को दोहन करते हैं।
गांव देहात में होती है पानी की बेहिसाब बरबादी
ग्रामीण इलाकों में नहरों और ट्यूबवेल के माध्यम से सिंचाई होती है। नलकूप विभाग के मुताबिक जिले मेें 134 नलकूप हैं, लेकिन जिले में कितने पंपिंग सेट हैं, इसकी जानकारी जिम्मेदारों को नहीं है। एक-एक पंपिंग सेट से हर साल हजारों गैलन लीटर पानी खींचा जाता है, लेकिन इस दोहन का कोई हिसाब किताब नहीं है। कृषि संपन्न जिले में खेतों में जरूरत से ज्यादा पानी खर्च किया जाता है।
जल्द ही सबमर्सिबल पंप का लाइसेंस होगा अनिवार्य
सरकार अब अंधाधुंध हो रहे जलदोहन पर गंभीर नजर आ रही है। वह बिना अनुमति सबमर्सिबल पंप या बोरिंग पर रोक लगाने जा रही है। यह लाइसेंस तब मिलेगा जब रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा होगा। लापरवाही पर जुर्माने के साथ सजा का प्रावधान रखा गया है। इस बात की जानकारी लखनऊ में हुई एक पत्रकार वार्ता में जलशक्ति मंत्री ने दी थी।
जिले में पानी की स्थिति ब्लॉक/पानी का लेवल
बीसलपुर-11.25 फुट, बरखेड़ा-11 फुट, पूरनपुर-10 से 11 फुट, बिलसंडा/10.50 से 11 फुट, अमरिया-13 फुट, ललौरीखेड़ा-10.50 से 11 फुट, मरौरी-9 फुट
औद्योगिक क्षेत्रों में सबमर्सिबल पंप से जल दोहन करने वालों पर यहां अंकुश लगाने का कोई प्रावधान नहीं है। अभी सबमर्सिबल पंप पर रोक संबंधी कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। यदि ऐसा कोई शासनादेश जारी होता है तो उस पर अमल किया जाएगा।
- निशा मिश्रा, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद