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सब गोलमाल है-1 पूरा जिला तो पौध लगात है, पर ये बकरी डायन खाए जात है

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पीलीभीत। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले पौधरोपण अभियान के तहत नौ अगस्त को जिले में 20.73 लाख से अधिक पौधे लगाने का दावा किया गया था, लेकिन चार दिन बाद ही ये पौधे दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। जिले में रोपे गए पौधों को बकरियां और अन्य मवेशी उजाड़ने में जुटे हैं। पौधों की सुरक्षा का कोई ध्यान नहीं रखा जा रहा है। बड़ी संख्या में पौधे सूखने लगे हैं। हालात ये हैं कि सप्ताह भर बाद ही रोपे गए पौधे ढूंढे नहीं मिलेंगे। मंगलवार को पौधरोपण की हकीकत का अमर उजाला की टीम ने जायजा लिया तो हालात बेहद चौंकाने वाले सामने आए।
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नौ अगस्त को पौधरोपण अभियान के तहत एक दिन में जिले भर में लक्ष्य से ज्यादा पौधे लगाने का दावा किया गया था। साथ ही यह भी दावा थी कि सभी स्थानों पर रोपे गए पौधों का संरक्षण किया जाएगा। सूचना शासन को भेजकर खुद पीठ भी थपथपाई गई, लेकिन मंगलवार को जब हकीकत देखी गई तो रोपे गए पौधों को बकरियां खाती मिलीं। बड़ी तादाद में पौधे सूखने भी लगे थे। यह इस साल ही नहीं हुआ है। साल-दर-साल सिलसिला चल रहा है। पौधे रोपे जाते हैं। रिकॉर्ड बनते हैं और फिर कागजों में दफन हो जाते हैं।

साहब ! पिछले साल रोपे पौधों का तो मिट गया नामोनिशान
पूरनपुर। नौ अगस्त को पूरनपुर क्षेत्र में करीब पांच लाख पौध लगाने का दावा किया गया। अभियान के दिन मुख्य रूप से असम हाईवे के किनारे पौध लगाई गई। इसके संरक्षण को लेकर तमाम दावे किए गए, लेकिन चार दिन बाद ही पौधों की स्थिति नाजुक हो गई। पानी के अभाव में अधिकतर पौधे सूखने लगे है। वहीं पूर्व में किए गए पौधरोपण के प्रति अफसर कितने संजीदा रहे, इसकी भी जब अमर उजाला ने हकीकत परखी तो खेल सामने आ गया। सपा सरकार के कार्यकाल में वृहद पौधरोपण अभियान के तहत पूरनपुर के समरिया गांव में ग्राम पंचायत की तीन एकड़ जमीन पर करीब 900 पेड़ लगाए गए थे, लेकिन वर्तमान में वहां एक भी पौधा दिखाई नहीं दिया। मात्र झाड़ियां खड़ी दिखीं
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यहां तो अफसर ही स्वीकार रहे पौधे हो गए नष्ट
बीसलपुर। वृहद पौधरोपण के तहत नौ अगस्त को तहसील क्षेत्र के अंतर्गत मंडी परिसर में पालिका की ओर से करीब ढाई लाख पौधे रोपे गए। इसके अलावा भी कई स्थानों पर पौधरोपण किया गया, साथ ही संरक्षण पर बल दिया लेकिन चार दिन बाद ही पौधों की रंगत बदल गई है। कहीं मवेशी उजाड़ने में जुटे है तो कहीं पौधे सूखने लगे हैं। इधर पिछले साल हुए पौधरोपण की बात करें तो हरियाली के दावे की पोल खुलती दिखाई दी। तहसील क्षेत्र में अन्य इलाकों में जहां ढाई लाख पौधे लगाए गए थे, वहीं पिछले साल मंडी परिसर में पालिका प्रशासन की ओर से करीब 700 पौधे लगाए गए, लेकिन लगाने के बाद पौधों का संरक्षण करना ही जिम्मेदार भूल गए। नतीजतन अधिकतर पौधे नष्ट हो गए। इस बात की पुष्टि करते हुए मंडी कार्यालय अधीक्षक शिवकुमार मिश्रा ने बताया कि पिछले वर्ष मंडी परिसर में 700 पौधे लगाए गए थे, जिसमें बमुश्किल 20-25 पौधे ही जीवित हैं। कार्यालय अधीक्षक ने यह भी बताया कि मंडी प्रशासन ने बिलसंडा उपमंडी स्थल और कस्बा बरखेड़ा में भी आठ हजार पौधे लगवाए, लेकिन बजट न होने के कारण सभी पौधे पूरी तरह से असुरक्षित हैं। बीडीओ जेसी जोशी ने वन विभाग के अधिकारियों की ओर से पिछले वर्ष किए गए पौधरोपण के सुरक्षित होने के दावे का खंडन करते हुए कहा कि बमुश्किल 50 फीसदी पौधे जीवित होंगे। बीडीओ ने यह भी बताया कि पांच प्रतिशत पौधे तो उसी दिन खत्म हो जाते हैं, जिस दिन पौधरोपण होता है।

कहीं नहीं दिखा फॉरेस्ट गार्ड
मंगलवार दोपहर बाद अमर उजाला की टीम ने माधोटांडा, पूरनपुर व बीसलपुर क्षेत्र में पौधरोपण की हकीकत देखी तो तो कहीं भी कोई फॉरेस्ट गार्ड नहीं दिखा जबकि वन विभाग का दावा था कि पौधों की रखवाली के लिए वन रक्षक तैनात किए गए हैं। हालांकि तीन मजदूर रोपे गए पौधों पर मिट्टी चढ़ाते जरूर मिले। जब उनसे बात की गई तो उनका कहना था कि पौधे तो लग गए हैं, लेकिन तेज धूप से सूखने लगे हैं। एक-दो दिन में बारिश नहीं हुई तो कोई पौधा नहीं बचेगा।

साहब ! चाहे लाखों के लगवाओ पर पहले वाले तो बचाओ
पिछले साल पौधरोपण अभियान के तहत जिले में विभिन्न स्थानों पर नौ लाख से अधिक पौधे रोपे गए गए थे। इनमें से तकरीबन 60 फीसदी पौधे अपनी जगह से गायब हो चुके हैं। ऐसे में इस बार के पौधरोपण को लेकर भी अफसरों की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं कि वे इन्हें बचाने के प्रति कितनी संजीदगी दिखाएंगे। पिछले साल विभिन्न विभागों ने लगभग नौ लाख पौधे रोपे थे। ग्राम पंचायतों में तालाबों के किनारे, खलिहानों और चारागाहों की जमीनों पर रोपे गए पौधे मंगलवार को ढूंढने से भी नहीं मिले।

वृहद अभियान के तहत जहां भी पौधरोपण किया गया है, वहां पौधों की पूरी निगरानी कराई जा रही है। विभागीय कर्मचारी पौधों की देखभाल और उनकी सुरक्षा के लिए तैनात किए गए हैं।
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-संजीव कुमार, प्रभागीय निदेशक पर्यांवरण वन एव जलवायु परिवर्तन पीलीभीत
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