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नाकारेपन का जिम्मा कम स्टाफ के सिर

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पीलीभीत। टाइगर रिजर्व की सुरक्षा को लेकर अफसर अब फील्ड स्टाफ की कमी का रोना रो रहे हैं। जबकि जिस रेंज में स्टाफ पूरा है, वहां भी लकड़ियों का अवैध कटान व अनियमितता पाई जा रही है। हरीपुर रेंज में अवैध कटान में संलिप्त पाए जाने पर कुछ कर्मियों पर कार्रवाई भी हुई।
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पांच रेंजों में फैले जिले के जंगल को पांच साल पूर्व टाइगर रिजर्व का दर्जा तो दे दिया गया, लेकिन स्थिति आज भी नहीं सुधर सकी है। जहां टाइगर रिजर्व में बाघ, तेंदुए समेत वन्यजीवों की संख्या में इजाफा हो रहा है वहीं उनकी सुरक्षा को लेकर भी चुनौती बढ़ती जा रही है। वजह यह है कि टाइगर रिजर्व में फील्ड स्टाफ की काफी कम है। इसमें वन दरोगा व वनरक्षक के स्वीकृत पद में से आधे भी तैनात नहीं है। यह दीगर है कि सीमित स्टाफ की मदद से ही अफसर वन और वन्यजीवों की सुरक्षा को बेहतर बनाने का दावा करते हैं। लेकिन एक सच यह भी है कि वन विभाग के कर्मियों से मिलीभगत से ही जंगल में शिकार व अन्य अवैध धंधे हो रहे हैं।
इधर वन्यजीवों की लगातार बढ़ती संख्या के बाद उनकी सुरक्षा के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए फील्ड स्टाफ की कमी आड़े आ रही है। अफसर पत्र के माध्यम लगातार स्टाफ की मांग कर रहे है, लेकिन स्टाफ बढ़ तो नहीं सका, दिन प्रतिदिन संख्या और कम हो रहा है। चार दिन पूर्व माला रेंज में तैनात वन दरोगा शैदुल रहमान और महोफ रेंज में तैनात वन रक्षक नंद बेलवाल रिटायर हो गए। ऐसे में समय रहते शासन स्तर से फील्ड स्टाफ की कमी को पूरा नहीं किया जा सका तो वन और वन्यजीवों की सुरक्षा तो खतरे में पड़ेगी ही, साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष का दायरा भी बढ़ जाएगा।
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दिसंबर में रिटायर होंगे दस वनकर्मी
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक टाइगर रिजर्व की विभिन्न रेंजों में तैनात स्टाफ में दस वनकर्मी दिसंबर में रिटायर हो रहे है। जिसमें वन दरोगा व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल है। ऐसे में अफसरों को शासन स्तर पर पैरवी कर टाइगर रिजर्व में स्टाफ की कमी को जल्द दूर करने के प्रयास तेज करने होंगे।

यह है स्टाफ की स्थिति
पदनाम स्वीकृत पद तैनाती
क्षेत्रीय वनाधिकारी 9 5
उपक्षेत्रीय अधिकारी 8 6
वन दरोगा 50 34
वन रक्षक 52 16

स्टाफ की कमी को लेकर मुख्यालय स्तर पर पूर्व में ही पत्राचार किए जा रहे हैं। मौजूदा स्टाफ से ही व्यवस्थाओं को चलाया जा रहा है। हालांकि स्टाफ की कमी को पूरा करने के प्रयास जारी हैं।
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- नवीन खंडेलवाल, डीएफओ, पीलीभीत टाइगर रिजर्व
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