पीलीभीत। टाइगर रिजर्व में बाघ, तेंदुए समेत अन्य वन्यजीवों की संख्या में इजाफा हुआ है, लेकिन जंगल क्षेत्र का दायरा सिकुड़ता जा रहा है। जहां पहले कभी नेपाल तक जंगल हुआ करता था, आज वहां खेती हो रही है। सूत्रों की माने तो वन विभाग ने कई रेंज क्षेत्रों में जो अवैध कब्जे दर्शाए हैं, हकीकत में उससे कहीं ज्यादा कब्जे हैं, लेकिन वन रक्षक से लेकर अफसर तक अपनी गर्दन बचाने के चक्कर में आंकड़ों में हेराफेरी कर माफिया को बढ़ावा दे रहे है। यही वजह है कि पर्याप्त दायरा न मिलने के चलते वन्यजीव आबादी क्षेत्र की ओर आ रहे है। ऐसे में जंगल का दायरा बढ़ाने पर अमल नहीं किया गया तो स्थिति और बदतर हो जाएगी। हालांकि टाइगर रिजर्व बनने के बाद शुरुआत में तत्कालीन डीएम ओएन सिंह ने टाइगर रिजर्व का कोर और बफर जोन बढ़ाने के निर्देश दिए थे, ताकि वन्यजीवों की संख्या बढ़ने पर मानव और वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं न बढ़ सकें। टाइगर रिजर्व का 71,288 वर्ग किमी एरिया है। इसमें काफी वन भूमि पर अवैध कब्जे है।
बराही रेंज में चिह्नित भूमि के अलावा हैं सैकड़ों एकड़ पर कब्जा
पूर्व के वर्षों में भले ही वन भूमि पर कब्जा करने वाले कुछ अतिक्रमणकारियों के खिलाफ विभागीय केस काटे गए थे। विभाग उसी भूमि को अपने आंकड़ों में अवैध कब्जा मान रहा है, जबकि सच्चाई कुछ और है। ढकिया ताल्लुके महाराजपुर, रमनगरा, गुन्हान क्षेत्र में वन विभाग की 70 फीसदी भूमि भू-माफिया के कब्जे में है। इस समय वन भूमि पर धान और गन्ने की फसलें लहलहा रही हैं। कुछ क्षेत्रीय वनकर्मियों की साठगांठ के चलते सैकड़ों एकड़ वन भूमि पर खेती कर रहे है।
अतिक्रमण हटाने में वन विभाग नहीं दिखता गंभीर
जनपद की बराही और हरीपुर वन रेंज क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर वन भूमि पर अतिक्रमण है और यह अतिक्रमण दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मूसेपुर में 30 हेक्टेयर, बरुआ कुठारा में 180, बंदरबोझ में 99.80 हेक्टेयर समेत रमनगरा, ढकिया ताल्लुके महाराजपुर व गुन्हान क्षेत्र में वन भूमि पर अतिक्रमण करने वाले अवैध कब्जेदारों के खिलाफ पिछले वर्षों में विभागीय केस काटे गए थे। इसके बाद संयुक्त सीमांकन की बात कहकर हाथ पीछे खींच लिए गए। हकीकत यह है कि वन विभाग आज तक कब्जा हटाना तो दूर अपनी भूमि तक चिह्नित नहीं कर सका और अवैध कब्जेदार वारे न्यारे कर रहे हैं।
वन विभाग की लचर कार्रवाई है इसकी बड़ी वजह
पिछले लंबे समय से सरकार ने वन भूमि का एरिया तो दर्ज कर रखा था, लेकिन वन विभाग उसे राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं करा सका था। वर्ष 1999 में डीएम मनोज कुमार ने मामले को संज्ञान में लेकर पूरनपुर के सुनगढ़ी, लग्गा भग्गा, खानपुर, चुकटिहाई, चंदपुरा, वीरखेड़ा ता. महाराजपुर, नौजल्हा नकटहा, रमनगरा, बिजौरी खुर्दकलां, गजरौलाखुर्द, नहरोसा, चंदिया हजारा, डंडौल व लोहन्ना क्षेत्र के लेखपालों को 22378.15 एकड़ भूमि का अमल बरामद का मात्र एक ही दिन में कराने के आदेश दिए गए थे। जिसके बाद इन गांवों की 9310.17 एकड़ भूमि को वन भूमि में दर्ज कराकर अमल बरामद कर दिया गया था।
बाघ, तेंदुए और जंगली हाथियों की आबादी में आमद भी इसकी वजह
वन भूमि पर पूर्व से ही अतिक्रमण का दायरा बढ़ता जा रहा है। यही वजह है कि जहां पहले बाघ, तेंदुए, गैंडा, हाथी समेत अन्य वन्यजीव दोनों ओर विचरण करते थे, लेकिन आज भटकने पर मजबूर है। जंगल से बाहर निकल कर आबादी क्षेत्र के लिए मुसीबत बन रहे है। नतीजतन मानव वन्यजीव संघर्ष की गंभीर स्थिति हावी हो रही है। अब तक बाघ के हमले में करीब 24 लोग जान गवां चुके हैं। दस बाघों की भी मौत हुई है, इनमें दो बाघ तो ग्रामीणों द्वारा ही पीटकर मारे गए।
यह क्षेत्र बने संवेदनशील
अमरिया तहसील क्षेत्र के अंतर्गत गजरौला फार्म, जगत, रसूला, विशनपुर, सूरजपुर, भूड़ा कैमोर, उडऱा,भदसरा समेत कई गांवों की सीमा में पिछले सात सालों से बाघों का कुनबा की दहशत है। वहीं गजरौला क्षेत्र के अंतर्गत विनौर फार्म, गांधीनगर कॉलोनी, गोयल कॉलोनी, महुआ, सिरसा सरदहा आदि गांव की सीमा में शावकों के साथ बाघिन व बाघ की चहलकदमी बनी रहती है।
बोले ग्रामीण: वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जंगल का दायरा बढ़ाना जरूरी
शारदा नदी के पार नेपाल सीमा तक जंगल थे, जहां आज खेती हो रही है। जंगल का दायरा सिकुड़ने के चलते जंगली जानवर भी मैदानी इलाके की ओर अधिक रुख कर रहे है। वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए ठोस व्यवस्था करनी होगी।
- बिल्लू राजभर, क्षेत्रीय अध्यक्ष, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, रमनगरा
शारदा नदी के पार सरकार को राजस्व और वन भूमि के लिए ठोस रणनीति बनाकर संयुक्त सीमांकन कर देना चाहिए। ताकि वन और राजस्व विभाग की सीमा निर्धारित हो जाए। वन भूमि पर जंगल तैयार हो जाए और राजस्व विभाग की भूमि पर ग्रामीण भी अपनी आबादी बसाकर खेती कर सके।
- राम दरस, पूर्व प्रधान, रमनगरा
टाइगर रिजर्व में वन और वन्यजीवों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। वन भूमि पर अवैध कब्जों को लेकर अभी मुझे स्पष्ट जानकारी नहीं हो सकी है। जल्द ही पूरी स्थिति को समझकर अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई पर अमल शुरू कर दिया जाएगा।
- नवीन खंडेलवाल, डीएफओ, पीलीभीत टाइगर रिजर्व