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कड़ाके की ठंड में प्रदूषण ने बढ़ा दी बीमारियां...शरीर में घट रही ऑक्सीजन

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पीलीभीत। इस जाड़े के मौसम में प्रदूषण ने बीमारियों का ग्राफ और भी बढ़ा दिया है। प्रदूषण के कारण पर्याप्त ऑक्सीजन न मिल पाने से बीमारियों से ग्रस्त होने वाले लोगों की संख्या बढ़ गई है। सरकारी अस्पताल की ओपीडी में रोजाना ही करीब 25-30 फीसदी मरीज इन समस्याओं के ही पहुंच रहे हैं। प्रदूषण बढ़ने को इसी से समझा जा सकता है कि पिछले चार दिन में एक्यूआई 40 प्वाइंट बढ़ गया है।
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तराई के इस जिले में पिछले पखवाड़ा भर से कड़ाके की सर्दी लोगों पर कहर बनकर टूट रही है। पारा लगातार लुढ़कता जा रहा है। आलम यह है कि पिछले सप्ताह से लोगों को धूप के दर्शन नहीं हुए हैं। ऐसे में बीमारियों का पनपना लाजिमी है। सबसे ज्यादा दिक्कतें ब्लड प्रेशर के मरीजों को हो रही है। अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ने से लोग हार्ट अटैक का भी शिकार हो रहे हैं। ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ने से पहले की तुलना में हार्ट अटैक के मरीजों की संख्या बढ़ी है। जिला अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक उनके पास श्वास रोग के जो मरीज आए, उनमें प्रदूषण से फेफड़ों की क्षमता भी 15 फीसदी घट पाई गई। शरीर में ऑक्सीजन लेवल कम होने, प्रतिरोधक क्षमता घटने और फ्री रेडिकल्स शरीर में बढ़ने से लोग बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। उनके मुताबिक प्रदूषण के महीन तत्वों के खून में मिलने की वजह से फ्री रेडिकल्स बढ़े हैं। इससे दूसरे अंदरूनी अंगों की क्षमता घटी है। इसका एक लक्षण सांस फूलना है। ऐसे में यह सामान्य बीमारी भी घातक होती जा रही है।
हथेलियां अधिक ठंडा होना भी बीमारी के लक्षण
सर्दी के मौसम में हथेलियों और पैर के तलुवों का बेहद ठंडा होना शरीर में ऑक्सीजन की कमी और ब्लड सर्कुलेशन का ठीक से न होने की ओर इशारा करती है। जिला अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक ऐसी स्थिति में एनिमिया, नर्व डैमेज, हाइपोथाइडोरिजम और हाइपोथर्मिया होने की आशंका रहती है। इससे बचने के लिए गर्म पानी में सेंधा नमक मिलाकर अपने हाथ और पैर कुछ देर के लिए डुबोकर रखें, हालांकि यह फौरी तौर पर ही होना चाहिए। इससे शरीर का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ेगा, वहीं सेंधा नमक शरीर में मैग्नीशियम का लेवल बढ़ाएगा। इससे शरीर को प्राकृतिक गर्माहट महसूस होगी।
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ऐसे बढ़ता गया एक्यूआई
10 जनवरी 110 प्वाइंट
11 जनवरी 115 प्वाइंट
12 जनवरी 130 प्वाइंट
13 जनवरी 150 प्वाइंट
प्रदूषण की स्थिति में हो रहा इजाफा
जिले में सर्दी के मौसम में प्रदूषण की मात्रा भी धीरे-धीरे बढ़ती हुई खतरनाक स्तर पर पहुंच रही हैं। समाधान विकास समिति के जिला समन्वयक लक्ष्मीकांत शर्मा ने बताया कि इन दिनों वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बढ़ता जा रहा है। जोकि संवेदनशील लोगों के लिए नुकसानदायक है। वायु की गति भी आठ से दस किमी प्रति घंटा के बीच है। वायु की गति में वृद्धि होने से ही मौसम में सुधार की संभावना है। संवेदनशील लोग मॉस्क का प्रयोग करें। सुबह-शाम जॉगिंग करने से परहेज करें। शर्मा ने बताया कि वायु गुणवत्ता सूचकांक की मात्रा बढ़ने के कई कारण होते हैं। ठंड में ओस गिरने और कोहरे से प्रदूषित कण भारी होने के चलते वायुमंडल में ऊपर नहीं जा पाते और निचले स्तर पर ही रहते हैं। इसके चलते ही वायुमंडल प्रदूषित होता है और लोग सांस और फेफड़ों संबंधी रोगों का शिकार होते हैं।
बेहतर सावधानी ही एकमात्र बचाव का रास्ता
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. रमाकांत सागर के मुताबिक अधिक ठंड होने पर हाई ब्लडप्रेशर और सांस के रोगियों की संख्या बढ़ी है। रोजाना ओपीडी में 20-25 फीसदी रोगी श्वास संबंधी बीमारियों और 10-15 फीसदी रोगी हाई ब्लडप्रेशर के पहुंच रहे हैं। सावधानी ही इसका एकमात्र बचाव है। खानपान में आयरन की मात्रा को बढ़ाए। सोयाबीन, खजूर, पालक, चुकंदर आदि का सेवन करें।
समाधान विकास समिति के जिला समन्वयक लक्ष्मीकांत शर्मा ने बताया कि वायु गुणवत्ता सूचकांक की मात्रा बढ़ने के कई कारण होते हैं। ठंड में ओस गिरने और कोहरे से प्रदूषित कण भारी होने के चलते वायुमंडल में ऊपर नहीं जा पाते और निचले स्तर पर ही रहते हैं। इसके चलते ही वायुमंडल प्रदूषित होता है और लोग सांस और फेफड़ों संबंधी रोगों का शिकार होते हैं।
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