पीलीभीत। किसान के नाम पर देवहा नदी के किनारे गैर उपजाऊ जमीन से बालू निकालने की 24 घंटे के अंदर नियम विरुद्ध अनुमति देने के मामले की जांच में भी खेल किया जा रहा है। प्रभारी मंत्री के सामने मामले की जांच एडीएम न्यायिक से कराने की बात तय होने के बावजूद मगर कोई लिखित आदेश जारी किए बगैर अतिरिक्त मजिस्ट्रेट वंदना त्रिवेदी को जांच के लिए भेज दिया गया। जबकि उनका गोंडा स्थानांतरण हो चुका है। आरोप है कि उन्होंने बयान भी सिर्फ माफिया पक्ष के ही कुछ लोगों के दर्ज किए।
बीसलपुर के ढुकसी गांव में देवहा नदी के किनारे किसान महेंद्रपाल के नाम से खेती योग्य जमीन बताकर बालू हटाने की अनुमति अफसरों ने 24 घंटे में जांच रिपोर्ट लगाकर दे दी थी। फिर यहां जेसीबी और पोपलैंड मशीनों से सैकड़ों ट्रैक्टर ट्रॉली, ट्रक और डंपर से खनन किया जाने लगा। जब समाचार पत्रों में अवैध खनन निकासी का यह मामला उछला तो बीसलपुर एसडीएम और तहसीलदार जांच करने गए। दोनों ने अपनी रिपोर्ट दे दी। फिर 11 जनवरी को पीलीभीत के प्रभारी मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य नागरिकता संशोधन रैली में हिस्सा लेने आए तो उनके सामने बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा ने अवैध खनन का यह मामला उठा दिया। प्रभारी मंत्री के सामने एडीएम न्यायिक देवेंद्र मिश्र से पूरे मामले की जांच कराया जाना तय हो गया। दो दिन तक एडीएम न्यायिक देवेंद्र मिश्र तक जांच के लिखित आदेश नहीं पहुंचे तो वह जांच करने मौके पर नहीं गए।
वहीं गोंडा ट्रांसफर हो चुकी अतिरिक्त मजिस्ट्रेट अधिकारी वंदना त्रिवेदी मंगलवार को जांच करने के लिए बीसलपुर एसडीएम और तहसीलदार को साथ लेकर ढुकसी गांव पहुंचीं। तभी प्रशासनिक अमले में चर्चा उठने लगी कि वंदना त्रिवेदी को तो रिलीव करने की बात चल रही थी तो फिर उनको खनन जैसे मामले की जांच कैसे मिल गई। फिलहाल, अतिरिक्त मजिस्ट्रेट के तौर पर कार्यरत वंदना त्रिवेदी ने जांच बेहद गोपनीय रखी। ढुकसी में रहने वाले गांव के लोगों ने बताया कि उनके गांव में जांच करने आए अफसरों ने केवल खनन निकासी करने वाले लोगों के बयान दर्ज किए। गांव वालों के अनुसार प्रशासन खनन निकासी करने वालों पर कार्रवाई करने के बजाय जांच के नाम पर मामले को दबाने में जुटा है। अगर यही हाल रहा तो देवहा नदी का रुख कभी भी उनके गांव की ओर मुड़ सकता है। गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। गांव वालों ने बताया कि वह इस तरह की जांच से संतुष्ट नहीं हैं। कोई सीनियर अधिकारी निष्पक्षता से आकर जांच करे, गांव वालों के बयान दर्ज करे। तभी जांच ठीक तरह से हो पाएगी।
प्रशासनिक अफसरों के आदेश पर इससे पहले एक्सईएन (बाढ़ खंड) विभागीय अवर अभियंताओं को भेजकर जांच करा चुके हैं। बाढ़ खंड के दोनों अवर अभियंताओं ने अपनी जांच रिपोर्ट में तकनीकी परीक्षण करने के बाद कहा था कि देवहा नदी के किनारे जेसीबी और पोपलैंड मशीनों से खुदाई की वजह से बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं। अगर नदी किनारे बालू- रेत की निकासी हुई तो धार का रुख गांव की ओर मुड़ सकता है। तब गांव के अस्तित्व को खतरा हो सकता है।
एडीएम एफआर अतुल सिंह के पास खनन का भी प्रभार हैं। इधर, जब देवहा नदी से खनन निकासी पर विवाद बढ़ने लगा तो वह अवकाश पर चले गए। उसके बाद से ही एडीएम न्यायिक को खनन निकासी की वैधता की जांच करने को मौखिक आदेश दिए गए थे। मगर, अब उनकी जगह शासन से ट्रांसफर हो चुकी अतिरिक्त मजिस्ट्रेट वंदना त्रिवेदी ने तहसीलदार के साथ गांव जाकर जांच की।
मुझे खनन की जांच करने के लिए मौखिक रूप से कहा गया था, लेकिन लिखित में आदेश नहीं मिला, इसलिए मैं मौके पर नहीं गया। लिखित आदेश मिलने पर ही मैं जांच करने जाऊंगा। -देवेंद्र मिश्र, एडीएम न्यायिक