पीलीभीत। नोड्यूज के नाम पर वसूली करने के आरोप में घिरे पंचायत सचिव पर आखिरकार गाज गिर ही गई। कई दिनों तक निचले स्तर पर अफसर मामले को दबाए हुए थे। डीएम ने मामले का संज्ञान लेकर सख्त रुख अपनाया। पंचायत सचिव को प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए निलंबित कर दिया है।
पंचायत चुनाव में बकाया होने पर प्रत्याशी चुनाव नहीं लड़ सकते थे। ऐसे में प्रत्याशियों से नोड्यूज मांगे हुए थे। उन्हें नामांकन के साथ ही दाखिल किया जाना था। इसे लेकर ब्लॉकों और तहसीलों पर भीड़ उमड़ने पर वसूली भी शुरू हो गई थी। बीसलपुर तहसील में कार्यरत एक संग्रह लिपिक का निलंबन सप्ताह भर पहले हुआ था। इसी के बाद 14 अप्रैल को अमरिया ब्लॉक पर तैनात पंचायत सचिव प्रेम शंकर का वसूली का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। सचिव पर पहले भी कई आरोप लगे थे, मगर कुछ अफसरों का संरक्षण होने के चलते उसे हर बार बचा दिया जाता था। इस बार भी तीन दिन तक वायरल वीडियो पर जांच तक शुरू नहीं कराई गई थी। इस मामले को विकास और पंचायत विभाग के अफसर दबाने में जुटे हुए थे। अमर उजाला ने 18 अप्रैल के अंक में सिस्टम की लापरवाही को उजाकर करते हुए ‘वसूली के आरोप में घिरे सचिव की जांच अभी तक नहीं’ शीर्षक से प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। डीएम पुलकित खरे ने इसका संज्ञान लिया और फिर रविवार रात को ही सीडीओ प्रशांत श्रीवास्तव से प्रकरण की रिपोर्ट तलब की। उसके बाद सचिव को निलंबित कर दिया है।
नोड्यूज के नाम पर वसूली का वीडियो वायरल होने का मामला संज्ञान में आते ही सख्त एक्शन लिया गया है। पंचायत सचिव को निलंबित कर दिया गया है। पूरे प्रकरण की जांच कराने के निर्देश सीडीओ को दिए गए हैं। भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं होगी। - पुलकित खरे, डीएम