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मनरेगा घोटाले के आरोपी का नामांकन निरस्त

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पीलीभीत। मनरेगा में घोटाला करने के बाद जेल गए और अब जमानत पर छूटने के बाद जिला पंचायत सदस्य पद पर नामांकन कराने वाले बर्खास्त रोजगार सेवक की उम्मीदों पर पानी फिर गया। किए गए नामांकन में एफआईआर की बात छिपाने और बर्खास्त कर्मचारी होने पर उसका नामांकन निरस्त किया गया है।
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पिछले साल अमरिया ब्लॉक क्षेत्र में मनरेगा में करोड़ों का घोटाला हुआ था। इसमें एक एपीओ और तीन रोजगार सेवक बर्खास्त किए गए थे। चारों पर डीसी मनरेगा मृणाल सिंह की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर 26 अगस्त को जेल भेज दिया था। इस मामले में फंसे एक बर्खास्त रोजगार सेवक ने इस बार जिला पंचायत सदस्य पद पर अपना नामांकन कराया था। इसके बाद से वह सुर्खियों में था। मगर उसका चुनाव लड़ने का अरमान धरा रह गया। एडीएम न्यायिक देवेंद्र प्रताप मिश्र ने बताया कि चूंकि नामांकन करने वाला बर्खास्त कर्मचारी था। इसके अलावा उसके नामांकन पत्र में एफआईआर की बात छिपाई गई थी। इसी को लेकर उसका नामांकन निरस्त किया गया है।
56 नामांकन पत्र जांच में हुए निरस्त
पूरनपुर पंचायत चुनाव में 56 प्रत्याशियों के नामांकन पत्र जांच में निरस्त हो गए। आरओ नरेंद्र यादव ने बताया कि प्रधान पद के छह, क्षेत्र पंचायत सदस्य के सात और ग्राम पंचायत सदस्य के 43 नामांकन पत्र जांच के बाद विभिन्न कमियों पर निरस्त किए गए। प्रधान पद के निरस्त किए गए नामांकनों में दो प्रत्याशी निर्धारित आयु को पूरा नहीं कर रहे थे। दो के नाम मतदाता सूची में नहीं थे।
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दोनों नामांकन जांच में निरस्त होने पर रिक्त रह गई सीट
दुधियाखुर्द ग्राम पंचायत में क्षेत्र पंचायत की एक सीट के लिए दो नामांकन दाखिल किए गए थे। पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित सीट पर एक नामांकन सामान्य जाति का दाखिल होने पर निरस्त कर दिया गया, जबकि दूसरे नामांकन पत्र में दिए गए प्रस्तावक का नाम मतदाता सूची में नहीं था। प्रत्याशी का तर्क था कि धोखे से पिछले चुनाव की मतदाता सूची देख ली थी। आरओ ने बताया कि नियमानुसार ही नामांकन पत्रों को निरस्त किया गया है।
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