पीलीभीत। चीनी मिलों ने इस सत्र में अब तक 127.5 करोड़ रुपये से अधिक कीमत के गन्ने की पेराई कर दी है, लेकिन किसानों को एक रुपये का भी भुगतान नहीं हुआ। कारण यह है कि अभी तक नया मूल्य तय नहीं हुआ है। किसान संगठन सरकार से गन्ना मूल्य तय करने की मांग कर रहे हैं। इसके बावजूद सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है।
गन्ने की फसल खेतों में तैयार हो चुकी है। चीनी मिलों ने वर्ष 2019-20 के लिए गन्ने की पेराई भी शुरू कर दी है। अनुमान के मुताबिक उत्पादन होने पर भी किसानों के चेहरे पर मायूसी है, लेकिन सरकार कीमत तय करने में हीलाहवाली कर रही है। जिले के किसानों का गन्ना चार चीनी मिलों के क्रय केंद्रों पर जाता है। जिले के किसानों का 39.24 लाख क्विंटल से अधिक गन्ने की पेराई हो चुकी है। किसान इस बार 450 रुपये प्रति क्विंटल से कम कीमत पर राजी नहीं हैं। मगर उनकी मांग किस हद तक मानी जाएगी, यह तो बाद में ही पता चलेगा।
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2018-19 में गन्ने की कीमत तीन तरह से तय की थी। अगैती गन्ने की कीमत 325 रुपये, सामान्य किस्म का गन्ना 315 और अनपयुक्त प्रजाति के गन्ने की कीमत 310 रुपये प्रति क्विंटल तय की थी। इसी दर के आधार पर किसानों को भुगतान भी किया गया। इस बार किसान संगठन 450 रुपये प्रति क्विंटल की कीमत मांग रहे हैं।
चीनी मिलों ने नए गन्ना की पेराई तो शुरू कर दी है, लेकिन एलएच चीनी मिल को छोड़कर शेष बची तीन चीनी मिलों पर गत सत्र का 131.17 करोड़ रुपये बकाया हैं। इसमें सर्वाधिक बरखेड़ा चीनी मिल पर 105.45 करोड़ रुपये बकाया हैं। जबकि बीसलपुर मिल पर 15.87 करोड़ और पूरनपुर मिल पर 9.84 करोड़ रुपये बकाया हैं।