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सीमा पर जवानों की शहादत से जनता में उबाल... नहीं खरीदेंगे चीनी माल

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पीलीभीत। लद्दाख सीमा पर चीन की कायराना हरकत के बाद शहीद भारतीय जवानों की शहादत से जनता में उबाल है। कारोबारी अब चीन को आर्थिक मोर्चे पर करारी चोट देने का मूड बना चुके हैं। चाहे व्यापारी वर्ग हो या फिर ग्राहक, सबकी जुबां से एक ही शब्द निकल रहा है कि चीन के सामान का बहिष्कार किया जाए। अगर सभी चीनी सामान के बहिष्कार का संकल्प ले लिया तो चीन को प्रति माह 150 करोड़ रुपये की चपत लगेगी।
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कारोबारियों के आंकड़े बताते हैं कि किस तरह चीन ने भारतीय बाजार पर धीरे-धीरे अपना कब्जा जमा लिया। स्पेयर पार्ट्स, मोबाइल फोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक, एसेसरीज, कॉस्मेटिक्स, खिलौने, सजावटी सामान के कारोबार में चीन की भारी हिस्सेदारी है। सबसे ज्यादा तो भारत मेडिकल दवाइयां बनाने के लिए मिलने वाले कच्चे माल में चीन पर निर्भर है।
मोबाइल बाजार पर 50 फीसदी से ज्यादा चीन का कब्जा
मोबाइल फोन के बाजार पर नजर डालें तो जितने भी सस्ते मोबाइल बाजार में बिक रहे हैं, वह चीन के ही बने हैं। मोबाइल कारोबारियों के अनुसार, चीनी मोबाइल और एसेसरीज की बाजार में 50 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी है। मोबाइल की दुकानों पर एक महीने में करीब 30 करोड़ से अधिक के चीनी उत्पादों का आयात होता है। हालांकि लॉकडाउन के बाद से चीन से सामान मंगाने में कुछ कमी आई है।
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स्पेयर पार्ट्स में चीन की 20 करोड़ की सेंधमारी
स्पेयर पार्ट्स के कारोबार में भी चीन के उत्पादों का कब्जा है। चीनी स्पार्क प्लग, चीनी बैरिंग और चीनी डिस्क पैड की बिक्री खूब होती है। वहीं, कार में चीनी फ्यूल पंप मोटर, चीनी क्लच वायर, चीनी कार एसेसरीज की डिमांड है। कारोबारियों के मुताबिक चीन के उत्पाद सस्ते जरूर होते हैं, मगर टिकाऊ नहीं होते।
गिफ्ट आइटम और खिलौने भी चाइनीज
बाजार में बिकने वाले गिफ्ट और खिलौनों में चीन की 80 फीसदी तक हिस्सेदारी है। कारोबारियों के मुताबिक, चीन की टेक्नोलॉजी भारत से कहीं आगे है। इसी वजह से चाहे गिफ्ट हों या फिर खिलौने, हर किसी की नजर चीनी उत्पादों पर ही पड़ती है क्योंकि यह बहुत ज्यादा महंगे नहीं होते। बाजार में चीन से बने इलेक्ट्रानिक गिफ्ट आइटम की ज्यादा डिमांड है। व्यापारियों के मुताबिक, एक महीने में चीन निर्मित गिफ्ट उत्पादों का पांच करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होता है।
इलेक्ट्रानिक बाजार में 30 करोड़ से अधिक कमाता है चीन
इलेक्ट्रानिक बाजार में भी चीन का खासा दखल है। कारोबारियों के मुताबिक, यदि हर माह 10 हजार एलईडी टीवी बिकते हैं तो इनमें 6000 तो ब्रांडेड कंपनियों के होते हैं, मगर शेष 4000 एलईडी टीवी चीन के बने होते हैं। इसके अलावा स्पीकर, माइक, म्यूजिक सिस्टम में चीन का बाजार पर बोलबाला है। यह चीनी उत्पाद इतने सस्ते होते हैं कि ग्राहक इसकी गुणवत्ता भूलकर मात्र खूबसूरती पर खरीदने को तैयार हो जाता है।
घड़ी में भी चीनी स्मार्ट बैंड का बोलबाला
कलाई पर सामान्य घड़ी की जगह स्मार्ट वॉच देखी जा रही हैं। कई फीचर्स होने के चलते यह खासी महंगी भी होती हैं, मगर चीन ने मध्यम वर्गीय परिवारों तक चीनी स्मार्ट बैंड पहुंचाकर बाजार पर अपनी पकड़ मजबूत बना ली है। घड़ी कारोबारियों का कहना है कि अधिकांश स्मार्ट बैंड चीन निर्मित ही होते हैं। वजह यह है कि यह शॉकप्रूफ होने के साथ स्मार्ट वॉच से काफी सस्ती होती है। स्मार्ट बैंड ऑनलाइन शॉपिंग के माध्यम से खरीदा जा रहा है। जनपद में घड़ी और मोबाइल फोन की दुकानों पर स्मार्ट बैंड का हर माह करीब 70 से 80 लाख या कभी-कभी एक करोड़ रुपये तक का कारोबार होता है।
कॉस्मेटिक्स, कपड़ा, इलेक्ट्रिक में भी चीन निर्मित सामान हावी
इसके आलावा बाजार में कॉस्मेटिक्स, दवा, मेडिकल उपकरण, कपड़ा कारोबार में भी चीन पूरी तरह हावी है। कारोबारियों के मुताबिक, चीन की अधिकांश ट्रेड में हिस्सेदारी है। बाजार में चीनी कॉस्मेटिक्स, मेडिकल उपकरण, कपड़े, बेडशीट, चादर, इलेक्ट्रिक सामान आदि का करीब 40 से 50 करोड़ के बीच कारोबार होता है।
लॉकडाउन के बाद चीनी माल आना बंद
स्पेयर पार्ट्स कारोबार में चीन के कई प्रोडक्ट शामिल थे, मगर लॉकडाउन के बाद चीनी माल आना बंद है। देश हित में चीन निर्मित सामान का बहिष्कार करना अब जरूरी हो गया है। हमें अब चीन से सामान नहीं मंगाना। - रूपम जायसवाल, स्पेयर पार्ट्स कारोबारी
देश में बने स्पेयर पार्ट्स खरीदेंगे
लॉकडाउन से ही चीनी पार्ट्स आना बंद हैं। इनके स्थान पर ग्राहक अपने देश में बने स्पेयर पार्ट्स खरीद रहे हैं। देश की परिस्थितियों को देखकर मैंने भी चीनी सामान का बहिष्कार करने का निर्णय ले लिया है। - मनीष मित्तल, कार के स्पेयर पार्ट्स व्यवसायी
चायनीज मोबाइल के ऑर्डर देना बंद
मोबाइल मार्केट में चीन की 50 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी थी। लॉकडाउन से चीनी मोबाइल आना बंद हो गए। चीनी फोन टिकाऊ भी नहीं होते हैं। मैंने तो चीन के मोबाइल का ऑर्डर देना बंद कर दिया है। - राहुल वर्मा, मोबाइल कारोबारी
चीनी उत्पादों का करेंगे बहिष्कार
गिफ्ट और खिलौनों में चीन की लॉकडाउन से पहले करीब 70-80 फीसदी तक हिस्सेदारी थी। कोविड-19 के बाद चीनी माल आना बंद है। हमने भी अब चीनी माल का बहिष्कार कर दिया है। हम चीन से कुछ नहीं मंगाएंगे। - अजय माहेश्वरी, गिफ्ट एवं खिलौना कारोबारी
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