पीलीभीत में स्कूल बाहर खड़े टेंपो में बैठते स्कूली बच्चे।संवाद
पीलीभीत। तमाम निर्देशों के बाद भी जिले में 10 से अधिक अनफिट स्कूली वाहनों से बच्चों को लाया जा रहा है। फॉग लाइट और अन्य इंतजाम भी अधूरे हैं। ई-रिक्शा से भी बच्चों को जोखिम के बीच स्कूल पहुंचाया जा रहा है। स्कूल प्रबंधन से लेकर विभागीय अधिकारी तक इससे बेखबर हैं। इससे हादसे का खतरा बना है।
शहर से लेकर देहात तक संचालित स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को लाने और ले जाने को 274 स्कूली वाहन पंजीकृत है। स्कूली वाहनों के लिए कई नियम भी हैं। इनमें वाहनों का पीला रंग, चालक का नाम और नंबर, खिड़की के पास जाली आदि लगाया जाना शामिल है। वाहनों की फिटनेेस भी होनी चाहिए। जिले में संचालित कई स्कूली वाहन इन नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।शुक्रवार को दोपहर करीब 2:30 बजे टनकपुर हाइवे पर छतरी चौराहे के निकट एक स्कूल के बाहर टेंपों में दस बच्चों को बैठाया गया। टेंपो का रंग तो पीला था, लेकिन अन्य मानक नजर नहीं आए। वहीं गौहनिया चौराहे पर जा रहे एक ई-रिक्शे में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया गया। इसमें सुरक्षा के लिहाज से एक भी साइड में कोई एंगल नहीं लगा था। कई अन्य स्कूली वाहनोंं में भी नियमों की अनदेखी नजर आई।
घटना के बाद सक्रिय दिखता है विभाग
विभागीय अधिकारी किसी क्षेत्र में घटना होने के बाद ही सक्रिय दिखाई देते हैं। विभाग अधिकारियों की वाहवाही लूटने के लिए कागजी कार्रवाई को पूरा करते हैं। चौराहे पर मौजूद रहने वाले पुलिस कर्मचारी उन पर कार्रवाई नहीं करते है। जिससे यह बेखौफ होकर इनका संचालन करते है।
फॉग लाइटों का निर्देश फिर भी नहीं दिया ध्यान
फॉग लाइटों को लेकर परिवहन विभाग की ओर से स्कूल प्रबंधन को निर्देश जारी किए गए। स्कूली वाहनों में फॉग लाइटें लगाई जाएं, लेकिन इनमें अब-तक फॉग लाइटों को भी नहीं लगवाया गया है।
अभियान चलाकर स्कूली वाहनों पर कार्रवाई की जाएगी। 15 अनफिट स्कूली वाहनों को नोटिस दी गई थी। करीब 12 अनफिट वाहन अभी संचालित हैं। जिन स्कूली वाहनों में नियमों की अनदेखी की जा रही है। उन पर कार्रवाई की जाएगी।- वीरेंद्र सिंह, एआरटीओ।