दो-दो प्रोजेक्ट भेजने के बाद भी मरम्मत को नहीं मिल सकी धनराशि
तराई की 50 हजार की आबादी लंबे अरसे से जर्जर मार्ग पर ठोकरें खाने को मजबूर
तराईवासियों ने अपनी फसलें बेचने व अन्य रोजगार संबंधी कार्य उत्तराखंड से किए शुरू
माधोटांडा (पीलीभीत)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के निर्देश दिए हैं। तराई की 50 हजार आबादी वाले गांवों को जोड़ने वाली बाइफरकेशन सड़क को सिंचाई विभाग की दो सब डिवीजनों ने गड्ढे भरने को प्रोजेक्ट बना कर भेजे। लेकिन आज तक सड़क की मरम्मत कराने के लिए एक पैसा भी स्वीकृत नहीं किया। जबकि इस सड़क पर बाइफरकेशन पर्यटक स्थल व शारदा डैम भी इसी मार्ग पर हैं।
जिला मुख्यालय समेत पूरनपुर से तराई को जाने के लिए एक मात्र बाईफरकेशन मार्ग ही है। इससे तराई की लगभग 50 हजार की आबादी तो गुजरती ही है, साथ ही इसी मार्ग पर इंडो नेपाल बार्डर की सुरक्षा करने वाली एसएसबी चौकी भी है। इस मार्ग को कई साल पहले आरईएस ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाया था, लेकिन घटिया कार्य के चलते यह मार्ग साल भर भी नहीं चला और क्षतिग्रस्त हो गया। वर्तमान में इस मार्ग की हालत यह है कि इस पर टॉप गेयर में कौन कहे थर्ड गेयर में भी वाहन नहीं चला सकते हैं।
दो-दो सब डिवीजनों ने भेजे थे प्रोजेक्ट
यह मार्ग कलीनगर पुल से लेकर हरदोई ब्रांच की दाई पटरी पर बाईफरकेशन तक सिंचाई विभाग की हेड वर्क्स खंड के अधीन है। जबकि बाईफरकेशन से शारदा डैम के दस किलोमीटर तक शारदा सागर खंड के अधीन है। हेड वर्क्स खंड ने पहले कलीनगर से वाईफरकेशन तक सड़क निर्माण कराने का प्रोजेक्ट भेजा था। हेड वर्क्स खंड के सहायक अभियंता रजनीश शर्मा बताते हैं कि सड़क निर्माण प्रोजेक्ट को मंजूरी न मिलने के बाद अधिकारियों के निर्देश पर अब अवर अभियंता अजय चौधरी व रोहित को लगाकर पैच लगाने को सर्वे कराया जा रहा है। इसके बाद ही इसका प्रोजेक्ट तैयार कर भेजा जाएगा। इधर शारदा सागर खंड ने भी वाईफरकेशन से शारदा डैम के दस किलोमीटर तक पैच वर्क के प्रोजेक्ट को तैयार करने से पूर्व सर्वे कराया है। शारदा सागर के अवर अभियंता रामेश्वर बताते हैं कि अधिशासी अभियंता ने दस किमी तक गड्ढे भरने को 33 लाख का प्रोजेक्ट भेजा है। हालांकि अभी धनराशि नहीं मिली है। प्रयास किया जा रहा है ताकि बजट मिलते ही मार्ग को गड्ढामुक्त कराया जा सके।
तराई वासी मार्ग को पीडब्ल्यूडी को देने की कर रहे मांग
तराई क्षेत्र की 50 हजार की आबादी लंबे समय से इसी जर्जर मार्ग से गुजर रही है। तराईवासी इस मार्ग को पीडब्ल्यूडी को देने की मांग करते आ रहे हैं। वहीं पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता भी सिंचाई विभाग को मार्ग ट्रांसफर कराने को लिखा पढ़ी कर चुके हैं। सरकार की इस हीलाहवाली का नतीजा यह निकला कि टाइगर रिजर्व के बीचों बीच से गुजरने वाले इस जर्जर मार्ग को लेकर बेहद परेशान हैं। जर्जर सड़क की मरम्मत न होने के कारण तराईवासियों अपनी फसलें व अन्य रोजगार पड़ोसी प्रांत उत्तराखंड के उपनगर खटीमा व अन्य नगरों से शुरू कर दिया है।