बाढ़ से घिरे नलडेंगा क्षेत्र को लेकर पखवाड़ा भर से शारदा सागर और बाढ़ खंड के बीच सीमा विवाद को लेकर खींचतान चल रही थी लेकिन मंगलवार को जब प्रमुख अभियंता के आने की भनक लगी तो सिंचाई विभाग ने आनन-फानन में ठेकेदारों को लगाकर बचाव कार्य कराने का ड्रामा शुरू कर दिया। दोपहर बाद पहुंचे प्रमुख अभियंता ने स्पर बचाव के लिए युद्धस्तर पर कार्य कराने के निर्देश दिए।
नलडेंगा क्षेत्र में शारदा डैम बनाते समय मार्जनल बांध के साथ पत्थर के स्पर बनाए गए थे। इसके चलते नदी शारदा डैम की ओर नहीं बढ़ पा रही थी। इसी के चलते इन स्परों की देखरेख करने वाले शारदा सागर खंड ने भी कई सालों से यहां झांककर नहीं देखा है। जब एक पखवाड़ा पहले नदी ने स्पर नंबर एक का कटान शुरू किया तो ग्रामीणों ने बाढ़ खंड को इसकी सूचना दी। तब बाढ़ खंड के अधिकारियों ने यह क्षेत्र शारदा सागर खंड के पास होने की बात कही थी। कटान बढ़ता गया और दो स्पर का आधे से अधिक भाग नदी की भेंट चढ़ गया। नदी स्पर नंबर तीन के अपस्ट्रीम में लूप बनाकर मार्जनल बांध की ओर बढ़ने लगी। यह मामला अखबारों की सुर्खियां बना तो जिला प्रशासन भी सतर्क हुआ। विधायक पीतमराम ने भी डीएम को अवगत कराया। इसके बाद मंगलवार को लखनऊ से सिंचाई विभाग के काफिले के साथ प्रमुख अभियंता ओम वर्मा नलडेंगा पहुंचे। मजे की बात यह थी कि जहां एक पखवाड़े से घास का एक तिनका भी नहीं काटा गया था। वहां स्परों की घास की कटाई के साथ एक जनरेटर और कुछ रेत भरे बोरे भी रखवा दिए गए। प्रमुख अभियंता ने कटान की स्थिति देखने के बाद स्थानीय अभियंताओं को कटान वाले क्षेत्र के स्परों को बचाने के लिए तत्काल मरम्मत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। स्थानीय अभियंताओं को कटान रोकने के बारे में भी बताया। यहां पहुंचे ग्रामीणों ने भी प्रमुख अभियंता से मिलकर समस्याएं बताई। इस मौके पर अधीक्षण अभियंता जीवनराम यादव, बाढ़ खंड एक्सईएन मिन्हाज अहमद, हरीशचंद्र यादव, सहायक अभियंता धर्म घोष, जय सिंह, श्याम सिंह बघेल आदि मौजूद रहे।