देश-विदेश के पर्यटकों की टाइगर रिजर्व में गैंडा देखने की तमन्ना भले ही लंबे इंतजार के बाद पूरी हो सके लेकिन टाइगर रिजर्व के अधिकारी जिस सूझबूझ से इलाके का चयन कर रहे हैं, उससे यह तो साफ है कि पर्यटकों को आसानी से गैंडा दिख सकेंगे। टाइगर रिजर्व की टीम इसी आधार पर इलाके का चयन करने के लिए सर्वे करने में जुटी है।
जिले का जंगल टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद राज्य मंत्री हाजी रियाज अहमद, हेमराज वर्मा और प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने यहां गैंडा परियोजना लागू करने की बात कहकर अधिकारियों से प्रोजेक्ट भेजने को कहा था। अधिकारियों ने इसका प्रस्ताव पहले ही भेज दिया था। टाइगर रिजर्व के अधिकारियों की मंशा है कि गैंडा परियोजना जंगल के उन इलाकों में लागू हो जहां से पर्यटकों को आसानी से गैंडा दिख सकें। इसके लिए महोफ वन रेंज के मैनाकोट कंपार्ट दो और तीन, चूका 59 एवं बराही रेंज के कंपार्टमेंट 63 तथा 64 का चयन किया गया है। यह इलाका खूबसूरत पर्यटन केंद्र बाइफरकेशन और चूका बीच से सटा है। दोनों वन रेंजों में लगभग 1500 हेक्टेयर क्षेत्रफल का चयन किया गया है। बराही के वन क्षेत्राधिकारी अनिल शाह ने बताया कि गैंडों के लिए जंगल में कौन सा इलाका ज्यादा अनुकूल और सुरक्षित रहेगा, इसका खास ध्यान रखा जा रहा है। इधर, महोफ रेंज के डिप्टी रेंजर मोबीन आरिफ ने बताया कि डीएफओ कैलाश प्रकाश के निर्देशन में पूरे क्षेत्र का सर्वे किया जा रहा है। प्रोजेक्ट बनने और मंजूर होने में अभी समय लगेगा। इसके लिए कई सर्वे होने हैं। पूरे क्षेत्र में तार फैसिंग कराई जाएगी। गैंडों की मॉनीटरिंग के लिए यहां हाथियों को भी खरीदा जाएगा।