पीलीभीत टाइगर रिजर्व में मौजूद उल्लू।फाइल फोटो
पीलीभीत। दीपावली पर उल्लू के शिकार की घटनाओं के मद्देनजर पीटीआर प्रशासन की ओर से सतर्क किया गया है। बता दें कि तांत्रिक क्रियाओं के चलते कुछ अंधविश्वासी उल्लू की बलि चढ़ाते हैं। जिसके चलते शिकार को अंजाम दिया जाता है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में काफी संख्या में उल्लू हैं। महालक्ष्मी का वाहन माने जाने वाले उल्लू का महत्व दीपावली के पहले बढ़ जाता है। ऐसे में कुछ अंधविश्वासी दीपावली के दिन उल्लू की बलि चढ़ाते हैं। इस दौरान उल्लुओं की कीमत भी बढ़ जाती है। इसको लेकर शिकारी जंगल में अवैध घुसपैठ कर उल्लू को पकड़ने की जुगत में जुट जाते हैं।
पकड़े जाने के बाद उल्लू को मंहगे दामों पर बेचते हैं। इसे देखते हुए पीलीभीत टाइगर रिजर्व प्रशासन ने जंगल और उससे सटे इलाके में अलर्ट जारी किया है। इसके लिए पीटीआर और सामाजिक वानिकी की टीमों को जरूरी हिदायत दी गई है।
टीमों को गठन कर लगातार गश्त करने पर जोर दिया जा रहा है। उल्लुओं का शिकार करते पकड़े जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि उल्लुओं के शिकार की घटनाओं के मद्देनजर अलर्ट जारी कर गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
000
पीटीआर में पाए जाते हैं 10 प्रकार के उल्लू
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 10 प्रकार के उल्लू पाए जाते हैं। जो पांच रेंज क्षेत्रों के अलावा जंगल से बाहर के इलाके में भी देखे जाते हैं। इनमें से कई प्रजातियां खास भी हैं। जिनकी अधिक डिमांड रहती है।