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Pilibhit: कोर्ट में आरोपी के शरीर पर चोटों का हिसाब नहीं दे पाई पुलिस, सीओ सिटी, कोतवाल व चौकी इंचार्ज पर केस

Wed, 05 Apr 2023 10:01 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत

सार

एनडीपीएस एक्ट के आरोपी नासिर ने जेल जाने से पूर्व अदालत में अपने शरीर पर चोटें दिखाते हुए पुलिस कर्मियों पर पिटाई का आरोप लगाया था।
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यूपी पुलिस - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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एनडीपीएस एक्ट के मुल्जिम के शरीर पर चोटों के मामले में तलब किए गए सीओ सिटी, शहर कोतवाल व चौकी इंचार्ज के जवाब से विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस एक्ट)/अपर सत्र न्यायाधीश संतुष्ट नहीं हुए। पुलिस हिरासत में आरोपी के शरीर में आठ में से सात चोटों का पुलिस कोई जवाब नहीं दे सकी। अदालत ने सीओ, कोतवाल व दरोगा के विरूद्ध मुकदमा (प्रकीर्ण वाद) दर्ज किया है। अब साक्ष्य के लिए 14 अप्रैल को जिला कारागार से आरोपी नासिर को तलब किया है।

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कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला मदीना शाह निवासी एनडीपीएस एक्ट के आरोपी नासिर ने जेल जाने से पूर्व अदालत में अपने शरीर पर चोटें दिखाते हुए पुलिस कर्मियों पर पिटाई का आरोप लगाया था। शिकायत पर अदालत ने सीओ (सिटी) सतीश कुमार शुक्ला, कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक नरेश त्यागी, मुकदमे के वादी ठेका पुलिस चौकी प्रभारी राजीव कुमार चौहान को तलब किया था। विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस एक्ट)/अपर सत्र न्यायाधीश चंद्र मोहन मिश्रा के न्यायालय में उपस्थित होकर तीनों ने अलग-अलग स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया था।

चोटों के बारे में पुलिसकर्मियों ने बताया कि नासिर में दो से तीन बार भागने की कोशिश की। उसने अहमद शाह की मजार के समीप लगे हुए सीमेंट के खंभे में अपने सिर का अगला हिस्सा बार-बार मारकर स्वयं को जख्मी कर लिया। बहुत मुश्किल से हल्का बल प्रयोग करते हुए नासिर को पकड़ा गया। जब अदालत ने पूछा कि फर्द में यह तथ्य क्यों नहीं है, इस पर पुलिस अधिकारी कोई जवाब नहीं दे सके। तीनों पुलिस अधिकारियों ने जो नया तथ्य रखा, उसका उल्लेख फर्द बरामदगी में नहीं किया था।
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अदालत ने पुलिस के तर्क को मनगढ़ंत मानते हुए सीओ सिटी सतीश शुक्ला, इंस्पेक्टर कोतवाली नरेश त्यागी व ठेका चौकी इंचार्ज राजीव कुमार चौहान के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने के वाद दर्ज करते हुए आरोपी को 14 अप्रैल को जेल से अदालत में तलब करने के आदेश दिए हैं।

अदालत ने मांगा एक-एक चोट का हिसाब, पुलिस खामोश
आरोपी नासिर के चिकित्सीय परीक्षण के दौरान उसके शरीर पर आठ चोटों का उल्लेख किया गया था। पुलिस अधिकारियों ने अपने स्पष्टीकरण में सिर खंभे में मारने की बात कही। इसे एक चोट का स्पष्टीकरण मान भी लिया जाए तो शरीर पर बाकी सात चोट कैसे लगीं। इस सवाल का जवाब पुलिस अधिकारी नहीं दे सके। इसी में पुलिस अधिकारी फंस गए। इतना ही नहीं पुलिस ने जीडी में नासिर के शरीर पर चार चोटें होने का उल्लेख किया। चिकित्सीय परीक्षण में आठ चोटें होने का उल्लेख है। विशेष न्यायाधीश ने सवाल किया कि जब जीडी में समस्त चोटों का उल्लेख है तब चिकित्सीय परीक्षण के समय शरीर पर चार अतिरिक्त चोटें कैसे आ गईं। इससे साफ है कि उसके साथ मारपीट की गई है।

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