बीसलपुर। एक समय अपने काम से पुरस्कार पाने वाली बीसलपुर किसान सहकारी चीनी मिल हर साल घाटा दर घाटा झेल रही है। इस बार भी चीनी मिल ने पिछले पेराई सत्र की जो बैलेंस शीट बनाई, उसमें 50 करोड़ रुपये का घाटा सामने आया। इसे मिलाकर अब तक किसान सहकारी चीनी मिल का घाटा पांच अरब रुपये तक पहुंच चुका है।
बीसलपुर में किसान सहकारी चीनी मिल की स्थापना वर्ष 1975 में हुई थी। वर्ष 1975 से 1988 तक हर साल चीनी मिल भारी मुनाफे में रही। वर्ष 1988 में चीनी मिल को सर्वाधिक राष्ट्रीय चीनी उत्पादकता में प्रथम पुरस्कार भी मिला था। यह पुरस्कार चीनी मिल के तत्कालीन जीएम एसपी सिंह को दिया गया था। मगर, उसके बाद किसान सहकारी मिल को किसी की ऐसी नजर लगी कि चीनी मिल हर साल घाटे में जाने लगी। वर्ष 1989 के बाद से अभी तक कोई भी ऐसा वर्ष नहीं गया, जबकि मिल को घाटा न हुआ हो। प्रारंभिक वर्षों में तो यह घाटा लाखों में रहा, मगर इधर कई वर्षों से घाटे ने करोड़ों रुपये का आंकड़ा छू लिया।
बीते पेराई सत्र में बीसलपुर चीनी मिल ने 38 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई करके 3.88 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया गया था। किसान सहकारी मिल जीएम एसडी सिंह ने बताया कि बीते पेराई सत्र की बैलेंस सीट बन चुकी है। पिछले पेराई सत्र में मिल को 50 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। चीनी मिल जीएम के अनुसार चीनी मिल की मशीनरी पुरानी हो चुकी है। कई वर्षों से पेराई सत्र चालू होते ही मशीनें खराब होने लगती हैं। साधारण खराबी में तो मशीनों को सही करा लिया जाता है। मगर, गंभीर खराबी होने पर उन्हें बदला जाता है। गन्ने की रिकवरी भी कई वर्षों से अच्छी नहीं आ रही है। इन सब खामियों की वजह से चीनी मिल को लगातार घाटा हो रहा है। जीएम ने बताया कि बीते पेराई सत्र में मिल को 50 करोड़ रुपये का घाटा हो गया। उसकी सूचना जिलाधिकारी और किसान सहकारी चीनी मिल संघ (फेडरेशन) के अधिकारियों को भेजी गई है।
घाटे से उबारने को भेजा प्रस्ताव
जीएम एसडी सिंह का कहना है कि किसान सहकारी चीनी मिल को घाटे से उबारने के लिए चीनी मिल ने कुछ प्रस्ताव शासन को भेजे हैं। इसमें कहा गया है कि गन्ने की प्रजाति 0238 की बुआई पर सख्ती से प्रतिबंध लगाया जाए क्योंकि इस प्रजाति के गन्ने की पेराई से रिकवरी काफी कम है। इस वजह से चीनी मिल को प्रतिवर्ष नुकसान हो रहा है। क्षेत्र में इस प्रजाति का गन्ना वर्ष 1988 से बहुत ज्यादा उगाया जा रहा है। मिल प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में लाउडस्पीकर से प्रचार कर किसानों को इस प्रजाति का गन्ना किसी भी हालत में न बोने का सुझाव दिया है। चीनी मिल प्रशासन ने किसानों को चेतावनी भी दी है कि यदि किसी किसान से इस प्रजाति का गन्ना बोया तो मिल गन्ना नहीं खरीदेगी। इसके अलावा घाटे से उबारने के लिए मिल परिसर में डिस्टलरी प्लांट और एथोनॉल प्लांट लगाने की संस्तुति भी की गई। इन प्रस्तावों पर एमडी के स्तर से तेजी पर विचार विमर्श चल रहा है।