गोमती नदी की खोदाई में जुटी जेसीबी मशीन। स्रोत ग्रामीण
- फोटो : Self
डीएम की निगरानी में चल रहा अभियान, 38 गांवों से होकर जनपद में 47 किलोमीटर की दूरी तय करती है गोमती नदी
कलीनगर। गोमती नदी की अविरल धारा को पुनर्जीवित करने के लिए प्रशासन ने अभियान तेज कर दिया है। नदी के अस्तित्व को बचाने और उसके प्राकृतिक प्रवाह को बहाल करने के उद्देश्य से अब 16 ग्राम पंचायतों में खोदाई कार्य कराया जाएगा। अभियान में प्रशासनिक मशीनरी के साथ स्थानीय लोगों का श्रमदान भी लिया जा रहा है। जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह स्वयं पूरे अभियान की निगरानी कर रहे हैं, समय-समय पर कार्यों की समीक्षा भी कर रहे हैं।
जनपद सीमा में गोमती नदी करीब 47 किलोमीटर का सफर तय करती है। इस दायरे में 16 ग्राम पंचायतें और 38 गांव आते हैं। वर्षों से उपेक्षा, गाद जमाव और अतिक्रमण के कारण कई स्थानों पर नदी का स्वरूप बिगड़ गया था। उद्गम स्थल के बाद कई हिस्सों में नदी अपनी पहचान खो चुकी थी और कहीं-कहीं उसका रूप नाले जैसा हो गया था। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने गोमती पुनर्जीवन अभियान शुरू किया। अभियान के तहत अब तक तीन चरणों में कार्य कराया जा चुका है। पहले चरण में गोमती के उद्गम स्थल से कार्य शुरू हुआ, दूसरे चरण में त्रिवेणी घाट क्षेत्र में खोदाई कराई गई, जबकि तीसरे चरण में दो दिन पहले फुलहर गांव की सीमा में कार्य शुरू कराया गया।
अब तक करीब साढ़े तीन किलोमीटर क्षेत्र में खोदाई का काम पूरा किया जा चुका है। प्रशासन की ओर से अभियान में जनसहभागिता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। श्रमदान के लिए ग्रामीणों से आगे आने की अपील की गई है। सफाई कर्मियों और स्वयंसेवकों को भी अभियान में लगाया है, जबकि कई स्थानों पर मशीनों की मदद से खोदाई कार्य कराया जा रहा है। इसके अलावा मनरेगा योजना के तहत गोमती नदी के किनारे स्थित तालाबों के जीर्णोद्धार का कार्य भी कराया जा रहा है, ताकि जल संरक्षण को बढ़ावा मिल सके और नदी के प्राकृतिक जलस्तर को बनाए रखने में मदद मिल सके। एसडीएम प्रमेश कुमार ने बताया कि गोमती नदी पर खोदाई कार्य जारी है। संवाद