बाजार में सोने के आभूषण पसंद करती महिलाएं।
पीलीभीत। शहर में आठ से दस सराफा कारोबारी हर माह दस लाख से लेकर 50 लाख तक की धनराशि को यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) के जरिये अपने व्यापार के खाते में लेते हैं। इनका कहना है कि प्रत्येक माह उनको भी अब पांच से बीस हजार तक एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) शुल्क चुकाना होगा। जो कि मुनाफे की कमाई होती थी वह अब एमडीआर शुल्क में कटेगी।
शहर में वैसे तो 100 के करीब छोटे-बड़े सराफा कारोबारी हैं। लगभग दस बड़े ज्वेलरी शोरूम हैं। इनमें प्रतिमाह 50 लाख तक की बिक्री के रुपये यूपीआई के जरिये ग्राहक कारोबारियों को देते हैं। ऐसे में 15 अक्तूबर से सभी यूपीआई उपयोग करने वाले कारोबारियों पर लागू हो रहे एमडीआर शुल्क 0.4 प्रतिशत को लेकर अभी कारोबारी नाखुश दिखाई दे रहे हैं।
शहर के बड़े सराफा कारोबारियों को कहना है कि आम व्यक्ति सिर्फ आज एक लाख तक यूपीआई ट्रांजेक्शन कर सकता है, जबकि उसकी लिमिट लगभग दो लाख होनी चाहिए। वहीं, जो एमडीआर शुल्क सरकार ने 2 हजार से अधिक पर लगाया है। उसकी लिमिट 5 हजार के ऊपर व एमडीआर शुल्क 0.1 प्रतिशत होगी तो आम कारोबारियों को इससे राहत मिलेगी।
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एमडीआर शुल्क के पक्ष में हैं, लेकिन नई नीतियां सरकार को इसके साथ और लाने की जरूरत है। ताकि बड़ा व्यापारी लंबे-चौड़े एमडीआर शुल्क से बच सकें व बोझ कम हो। - रचित अग्रवाल, सराफा कारोबारी
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सरकार का एक तरह से टैक्स ही है, बस इसमें छोटे कारोबारियों का मुनाफे का नुकसान होगा। जब सरकार को व्यापारी हर तरह का टैक्स दे रहा है तो यह बोझ है। - प्रियांश अग्रवाल, सराफा कारोबारी
बाजार में सोने के आभूषण पसंद करती महिलाएं।
बाजार में सोने के आभूषण पसंद करती महिलाएं।