धान की फसल को ब्राउन हापर और झुलसा रोग ने चपेट में ले लिया। इससे धान के पौधे पीले पड़ने के साथ सूखने लगे है। रोग को लेकर किसान परेशान हैं। दवाओं का स्प्रे करने के बाद भी राहत न मिलने पर अधपकी फसल काटकर बाजार में बेचने को मजबूर है।
धान की फसल में सिंचाई की अधिक जरूरत होती है। पहले रोपी गई धान की फसल को बारिश में अच्छी सिंचाई मिल गई, लेकिन बाद में रोपित की गई धान में सिंचाई को किसानों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। किसान नेता मंजीत सिंह ने बताया कि बारिश कम होने पर धान की फसल को बीमारियों ने घेरना शुरू कर दिया। फसल को बचाने को किसान कई बार कीटनाशक दवाईयों का स्प्रे कर चुके है। बीमारी के चलते धान की फसल पीली पड़ने लगी है। उन्होंने बताया कि धान की फसल में ब्राउन हापर रोग लगा है। इसमें कीट धान की बाली को चूस ले रहा है। उन्होंने बताया कि कई बार कीटनाशक दवाई का स्प्रे करने के बाद भी रोग से छुटकारा न मिलने पर कुछ किसान बगैर पके फसल को काटकर बिक्री करने में जुटे है। इससे किसान को औने-पौने दामों में फसल की बिक्री करनी पड़ रही है।