पीलीभीत। सरकारी एंबुलेंसों में मरीजों की प्रारंभिक जांच और इलाज न होने का खुलासा होने पर आखिर जिम्मेदारों की नींद टूट ही गई। उन्होंने स्टाफ को फटकार लगाई तो मरीजों के एंबुलेंसों में सहूलियतें मिलने लगीं। इससे मरीजों ने राहत महसूस की है। प्राथमिक जांचों का ब्योरा मिलने से डॉक्टरों को भी इलाज करने में आसानी हो रही है।
शुक्रवार के अंक में अमर उजाला ने सरकारी एंबुलेंसों में मरीजों को सुविधाएं न मिलने की खबर ‘सरकारी एंबुलेंसों में न कोई उपकरण और प्राथमिक इलाज की सुविधा’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की। इसके बाद 102 और 108 एंबुलेंस सेवा के कार्यक्रम प्रबंधक राजेश कुमार रोशन ने एंबुलेंस कर्मियों की आपात बैठक बुलाई। इसमें जिले में संचालित हो रही सभी 46 एंबुलेंस के चालक और ईएमटी पहुंचे। स्टाफ को लापरवाही पर सख्त लहजे में बताया गया कि जब एंबुलेंस में थर्मामीटर, रक्तचाप और मधुमेह (शुगर) मापी यंत्र, के साथ ही सभी आवश्यक दवाएं मौजूद हैं तो इनके इस्तेमाल से गुरेज क्यों।
इस पर कर्मचारियों ने अपनी गलती मानी और आगे से मरीजों को ये सभी सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर मुहैया कराने की बात कही। कार्यक्रम प्रबंधक ने बताया कि अब सभी एंबुलेंस के कर्मचारी मरीजों की जांचे करते हुए विभागीय ग्रुप में अपडेट करेंगे। इसकी शुरुआत शुक्रवार से ही हो गई है।