ग्रामीणों में रोष
ग्रामीणों का कहना है कि जहां यह घटना हुई, वहां आसपास कई पक्के मकान भी हैं। इस जर्जर लाइन को हटवाने के लिए विभाग को कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन अधिकारियों ने हमेशा इसे नजरअंदाज किया। ग्रामीणों का आरोप है कि तार टूटने की खबर तक बिजली निगम को नहीं थी, जो उनकी घोर लापरवाही को दर्शाता है।
व्यवस्था पर सवाल
इस घटना ने लावारिस पशुओं की समस्या को भी उजागर किया है। सरकार की कोशिशों और जिलाधिकारी के कड़े निर्देशों के बावजूद, गांवों में घूम रहे लावारिस पशुओं को पकड़ने की व्यवस्था पूरी तरह विफल नजर आ रही है। यदि प्रधान की सूझबूझ और ग्रामीणों की सतर्कता समय पर न होती, तो यहां कोई बड़ी मानवीय दुर्घटना घट सकती थी। ग्रामीणों ने प्रशासन से जर्जर बिजली लाइनों को तुरंत दुरुस्त करने और आवारा पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है।