इन ग्राम पंचायतों के लोग होते हैं प्रभावित
पूरनपुर तहसील के शारदा पार क्षेत्र में मुरैनिया गांधी, शांतिनगर, राणा प्रतापनगर, कबीरगंज, विजयनगर, नहरोसा, श्रीनगर, कुठिया गुदिया, सिद्धनगर, भरतपुर, वमनपुर भागीरथ, रामनगर, सिंघाड़ा उर्फ टाटरगंज, बैल्हा, अशोकनगर और शास्त्रीनगर समेत 16 ग्राम पंचायतें हैं। इनकी करीब एक लाख आबादी प्रभावित होती है। वहीं पुल बनने के बाद न केवल पूरनपुर तहसील मुख्यालय बल्कि जिला मुख्यालय, लखीमपुर खीरी, पलिया, संपूर्णानगर और नेपाल सीमा क्षेत्र तक आवागमन आसान होगा।
बाढ़ में बदल जाता है नदी का भूगोल
शारदा नदी हर साल मानसून में नया रास्ता चुनती है। लोंगो का कहना है कि बाढ़ के दौरान कई इलाकों में कटान होती है व पानी नई दिशा में बहने लगता है। यदि नदी का मुख्य बहाव बदल गया, तो पुल का मूल उद्देश्य ही बेइमानी हो जाएगा। सिद्धनगर के फतेह सिंह का कहना है कि पुल बनने की खुशी है, लेकिन नदी का रुख जिस तरह बदल रहा है, उससे भविष्य में पुल सुरक्षित रहेगा या नहीं, इस पर चिंता बनी हुई है। शास्त्रीनगर के हरनाम का कहना है कि बरसात में नदी का पानी कटान कर नई दिशा पकड़ लेता है। समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो पुल के बचाव में फिर करोड़ों रुपये फूंकने पड़ेंगे।
सेतु निगम के एसडीओ आशीष निरवाल ने बताया कि लोग केवल खड़े पिलर को देखकर भ्रमित हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी कई तरह की बातें चल रही हैं। पुल का निर्माण केवल इस पिलर तक सीमित नहीं है, बल्कि पीछे जंगल की ओर खड़ंजे के पास तक होना है। निर्माण का डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है कि नदी की मुख्य धारा पुल के छोर से 500 मीटर अंदर ही सीमित रहेगी। पेड़ों की कटान की स्वीकृति मिलते ही काम और तेज होगा। परियोजना को जून 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है।