पीलीभीत। भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी कुछ दिन पहले घोषित हो गई। कुछ पुराने स्थानीय भाजपा नेताओं को प्रदेश कार्यकारिणी में कोई न कोई पद मिलने की उम्मीद थी, मगर जब सूची जारी हुई तो उसमें अपना नाम न देखकर इन नेताओं को मायूसी हाथ लगी। ये पुराने भाजपा नेता जब प्रदेश कार्यकारिणी में जाने से वंचित रह गए तो पार्टी की बृज क्षेत्र की घोषित होने वाली नई टीम में पद हथियाने की जोड़तोड़ करने लगे हैं। एक पूर्व जिलाध्यक्ष जो वर्तमान में क्षेत्रीय टीम में हैं, उन्हें तो दर्जा राज्य मंत्री या किसी निगम का चेयरमैन बनने की आस हैं। यह अलग बात है कि जब भाजपा सत्ता से बाहर थी तो यह दूसरे दलों के विपक्षी प्रत्याशी को चुनाव तक लड़ा चुके हैं।
हाल ही में भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी में नामित पदाधिकारियों को नई सूची घोषित हुई तो उसमें पीलीभीत से किसी भी भाजपा नेता का प्रतिनिधित्व नहीं हो पाया। प्रदेश भाजपा कार्यकारिणी में बरेेली मंडल से केवल संजीव अग्रवाल को ही सह कोषाध्यक्ष के रूप में जगह मिल पायी। स्थानीय स्तर पर दो पूर्व जिलाध्यक्ष भी प्रदेश भाजपा की नई टीम में जाने की उम्मीद में थे, लेकिन जब सूची जारी हुई तो उसमें अपना नाम न देखकर पुराने दिग्गज मायूस हो गए। अब आने वाले दिनों में भाजपा की बृज क्षेत्र की नई टीम की घोषणा होनी है। इसके चलते अब ये दिग्गज क्षेत्रीय टीम में पद पाने की जोड़ तोड़ में लग गए हैं। एक पूर्व जिलाध्यक्ष तो वर्तमान में भी क्षेत्रीय टीम में अच्छे पद पर हैं। उनका अब क्षेत्रीय टीम में दोबारा जाने का विचार नहीं है क्योंकि वह बहुत वरिष्ठ हैं। सूत्रों के अनुसार उन नेताजी की इच्छा थी कि पार्टी उनकी वरिष्ठता को ध्यान में रखकर उन्हें प्रदेश कार्यकारिणी में कोई अच्छा पद दे या फिर किसी निगम बगैरह का चेयरमैन बनाए। हालांकि यह नेताजी कुछ साल पहले दूसरे दलों में रहकर विपक्षी प्रत्याशियों को चुनाव लड़ा चुके हैं। उसके बाद भाजपा में वापस आए।
प्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री रहे एक नेताजी हाल ही में भाजपा के अंदर ब्राह्मणों की उपेक्षा का मुद्दा उठने से उत्साहित हैं। उन्हें लगता है कि शायद इसी मुद्दे की आड़ में उनका कुछ भला हो जाए। हालांकि यह नेताजी भी सपा और कांग्रेस जैसे दलों में रह चुके हैं। इसीलिए संगठन का उच्च नेतृत्व इनकी निष्ठा कुछ संदिग्ध देखता है। फिर भी उन्हें उम्मीद है कि कई चुनावों में उनकी मेहनत एक न एक दिन जरूर रंग लाएगी। परिश्रम का फल एक न एक दिन उन्हें जरूर मिलेगा। एक अन्य नेताजी भी अपना जिलाध्यक्ष पद युवा चेहरे पर कुर्बान करने के बाद स्वयं को क्षेत्रीय टीम में समायोजित करने की आस लगाए हैं। यह अलग बात है कि जिलाध्यक्ष पद इन नेताजी ने स्वयं कुर्बान नहीं किया बल्कि मजबूरी में दूसरे को देना पड़ा। कुल मिलाकर तीन से चार पुराने भाजपाइयों को पार्टी की क्षेत्रीय टीम में जगह मिलने की उम्मीद है। भाजपा के पुराने नेता इसी हिसाब से नीचे से ऊपर तक जोड़-तोड़ में लगे हैं।
उम्मीद लगाए सभी नेता अभी मार्गदर्शक मंडल में
पिछले साल जब भाजपा संगठन के अंदर नया जिलाध्यक्ष मनोनीत किए जाने के लिए कार्यकार्यताओं की राय लेने की प्रक्रिया चल रही थी तो उसमें भी भाजपा में जिलाध्यक्ष पद हथियाने के लिए नए और पुराने नेताओं में कई दिन तक तगड़ी होड़ चली थी। मगर, तब भाजपा ने सारे कयास झुठलाते हुए जिलाध्यक्ष पद पर एक युवा चेहरे पर दांव लगाया और उसे यह पद सौंप भी दिया। उस समय ज्यादा उम्र वाले नेताओं को एक तरह से मार्ग दर्शक मंडल में डाल दिया गया। तब से यह नेतागण मार्गदर्शक मंडल में ही हैं। हालांकि उसमें जिलाध्यक्ष पद के दावेदार एक युवा भाजपा नेता को अंतिम दौर में अपना नाम सूची से बाहर होने से तगड़ी मायूसी हाथ लगी थी। तबसे वह युवा जिलाध्यक्ष न बन पाने की उस निराशा से बाहर नहीं निकल पाए हैं।