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भारत-नेपाल सीमा सड़क के निर्माण में बाधा नहीं बनेंगे पीटीआर के पेड़

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माधोटांडा। भारत-नेपाल सीमा सड़क के निर्माण में अब टाइगर रिजर्व रोड़ा नहीं डालेगा। टाइगर रिजर्व ने अपने क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सीमा पिलर 17 से लेकर 28 तक सड़क निर्माण में आने वाले 1520 पेड़ों को कटान के लिए चिह्नित किया है। फिलहाल राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) से एनओसी मिलने के बाद ही पेड़ों का कटान शुरू किया जाएगा।
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भारत-नेपाल की खुली सीमा पर होने वाली मादक पदार्थों की तस्करी और भारत विरोधी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सीमा पर सशस्त्र सीमा बल की तैनाती की गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वर्ष 2016 में खुली सीमा पर पेट्रोलिंग के लिए भारत-नेपाल सीमा के समांतर सीमा सड़क को बनाने की मंजूरी दी थी। प्रदेश के कई जिलों से होकर यह सड़क पीलीभीत से होकर गुजरनी है। तमाम अड़चनों के चलते लंबा वक्त बीतने के बाद भी सीमा सड़क का निर्माण अधर में लटका हुआ है।
बताते हैं कि पहले सीमा सड़क की चौड़ाई अधिक रखी गई थी। भारत-नेपाल सीमा के सीमावर्ती क्षेत्र में जब इसका सर्वे कराया गया तो सर्वे में टाइगर रिजर्व के हजारों पेड़ सड़क निर्माण में आड़े आ गए, जिसके चलते एनटीसीए ने एनओसी देने से इनकार कर दिया। इसके बाद पेड़ों को बचाने के लिए भारत-नेपाल सीमा सड़क की चौड़ाई कम करने का फैसला लिया गया। इसके बाद पीटीआर के अफसरों ने दोबारा सर्वे कराया तो टाइगर रिजर्व क्षेत्र में आने वाला जंगल की जमीन का जो रकबा था, उससे दोगुना रकबा वन विभाग के अधिकारियों ने शासन स्तर पर मांगा। इस पर शासन ने तत्कालीन डीएम ओनएन सिंह को पत्र जारी की जमीन मुहैय्या कराने के निर्देश दिए। तत्कालीन डीएम ने जनपद के सभी एसडीएम को पत्र जारी कर वन विभाग को दोगुना रकबा तलाश कर देने के लिए लिखा था, मगर बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद एक बार फिर बॉर्डर सड़क के निर्माण के प्रयास तेज हुए तो पीटीआर के क्षेत्र मेें खड़े पेड़ों की गणना कराई गई। इसके बाद रिपोर्ट बनाकर आगे भेज दी गई। उधर, सुरक्षा के लिहाज से अतिमहत्वपूर्ण इस सड़क को लेकर दिशा निर्देश मिलने के बाद वनाधिकारियों ने सड़क निर्माण क्षेत्र में खड़े वृक्षों को एक बार फिर चिह्नित किया। इसमेें विभिन्न प्रजाति के 1250 शामिल हैं। फिलहाल एनसीटीए से एनओसी मिलने के बाद ही पेड़ों का कटान किया जाएगा। उधर, सड़क क्षेत्र से सटे गांवों के लोगों से सहमति पत्र भी लिए जाएंगे। इसको लेकर बाकायदा बैठकेें होंगी।
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भारत-नेपाल सीमा सड़क का सर्वे पहले ही पूरा किया जा चुका है। जो पेड़ सड़क निर्माण में आ रहे थे, उनकी गणना कर रिपोर्ट आला अधिकारियों को भेज दी गई है। इन पेड़ों का छपान (चिन्हांकन) कराया गया है। अग्रिम कार्रवाई अफसरों के निर्देश पर ही की जाएगी। - दिनेश कुमार गोयल, वन क्षेत्राधिकारी, बराही रेंज
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