इसे तराई क्षेत्र के बंगाली समाज का दुर्भाग्य ही कहा जाए कि जहां माता पिता को तो देश की नागरिकता हासिल है और वह अपने वोट से सांसद विधायक भी चुनते रहे हैं, लेकिन देश में ही जन्मीं उनकी संतानों को बांग्लादेशी या घुसपैठिए कहकर वोटर बनने से रोका जा रहा है। खास बात यह है कि निर्वाचन आयोग द्वारा अभियान चलाकर 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं को वोटर बनाया जाता है, लेकिन इसी अभियान के दौरान इन बंगाली युवाओं से हर बार फार्म छह तो भरवाए जाते हैं, पर हर बार इन युवाओं का वोटर बनने का अधिकार महज सपना बनकर ही रह जाता है।
केस-1
महाराजपुर के चार बार ग्राम प्रधान रह चुके अजीत मंडल का नाम निर्वाचक नामावली की भाग संख्या चार वोटर संख्या 740 पर दर्ज है और उन्हें यहां की नागरिकता भी हासिल है। उनका 21 वर्षीय पुत्र अनिमेष मंडल बीकॉम का छात्र है। अजीत का दर्द यह है कि इलेक्शन से पूर्व उनसे फार्म छह तो भरवाया जाता है, लेकिन बेटे को वोटर नहीं बनाया जाता।
केस-2
कार्तिक मिस्त्री का पुनर्वासित परिवार है। इन दोनों पति पत्नी का नाम निर्वाचक नामावली की भाग संख्या पांच वोटर संख्या 140 पर अंकित है। आधार कार्ड भी है। उनका 20 वर्षीय पुत्र बृजेश बीकॉम, 18 वर्षीय विवेक बीए व 23 वर्षीय पुत्री पूजा एमकाम कर रही है। कार्तिक ने बताया कि जब भी वोट बनते हैं, तो फार्म छह भरकर मांगा तो जाता है, लेकिन वोट आज तक एक का भी नहीं बन सका।
केस-3
महाराजपुर निवासी समीर विश्वास का नाम निर्वाचक नामावली में भाग चार के वोटर संख्या 527 पर दर्ज है, लेकिन उनकी पत्नी 22 वर्षीय डोला रानी का नाम आज भी वोटर लिस्ट में शामिल नहीं किया गया। इसी तरह शांति देवी पत्नी कुमारेश मंडल के सास ससुर तो वोटर है, लेकिन उनके बेटा व बहू वोट न बनने से आज भी मताधिकार से वंचित हैं।
क्या कहते हैं बंगाली जनप्रतिनिधि
महाराजपुर के पूर्व प्रधान अजीत कुमार कहते हैं कि जनप्रतिनिधियों ने बंगालियों को राजनीतिक खिलौना बना रखा है। यही वजह है कि आज तक बच्चों के नाम वोटर लिस्ट में दर्ज नहीं किए जा रहे हैं। यह न्यायसंगत नहीं है। ग्राम प्रधान आशा मिस्त्री का कहना है कि जिसने इसी देश में जन्म लेकर शिक्षा प्राप्त की उसे ही मताधिकार से वंचित रखा जा रहा है। यह बंगालियों के साथ अन्याय है। गभिया सहराई के प्रधान दीपाली राय कहती हैं कि बंगाली समाज विडंबना है कि जो पुनर्वासित परिवार हैं उन्हीं परिवारों के बच्चों को मताधिकार से वंचित किया जा रहा है। स्थानीय सांसद, विधायक भी इस मामले में चुप्पी साधे हैं।
क्या कहते हैं युवा
हमने यही जन्म लिया और यही के स्कूल कॉलेजों में पढ़ते आ रहे है, लेकिन हमेें आज भी मतदाता बनने का अधिकार नहीं दिया गया। बृजेश मिस्त्री
जब हमारे माता पिता पुनर्वासित परिवार के हैं तो हमें बांग्लादेशी क्यों माना जा रहा है। जबकि माता पिता के वोट से ही सांसद व विधायक चुने जा चुके हैं। पूजा
हम युवाओं के वोट न बनने के पीछे कहीं न कहीं तो लापरवाही जरूर है। हमारी समस्याओं को उठाने वाले नेता तो सिर्फ वोट हथियाने तक ही सीमित रहते हैं। कुमारेश मंडल
हमारे पिता भारत के नागरिक है। मैं जिले के ही एक कॉलेज से बीएससी कर रहा हूं। नया वोटर बनने को फार्म भी भरवाया गया, लेकिन आज तक वोटर नहीं बनाया गया। आकाश मंडल
जांच के बाद ही बनाया जाएगा वोटर
बंगाली समुदाय के 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवाओं को वोटर बनाने के मामले में बीएलओ ने फार्म भरकर तो भेज दिए हैं, अब जांच के बाद ही इन्हें वोटर बनाया जाएगा।
विवेक मिश्रा, तहसीलदार, कलीनगर