शनिवार को भूकंप के
आए दो झटकों से हालांकि जिले में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन यहां ब्रिटिश
काल के बने कुछ गेट व भवन ऐसी हालत में हैं जो कभी भी गिर सकते थे। इन
भवनों से जनहानि होने से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद इनके रखरखाव
पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
शहर में बरेली गेट, मूलचंद्र धर्मशाला,
होमगार्ड कार्यालय, ड्रमंड कॉलेज, आयुर्वेदिक कॉलेज, पालिका कार्यालय सहित
कई ऐसे भवन में है काफी पुराने हैं। इनमें अधिकांश का निर्माण अंग्रेजी
हुकूमत के समय कराया गया था। कभी शहर की पहचान माने जाने वाले यह भवन आज
जर्जर हालत में हैं। मुख्य बाजार में स्थित बरेली गेट सहित चार गेट हैं।
इन
चारों गेट के नीचे दुकानें सजी हुई हैं और दिन भर आवाजाही रहती है। इससे
बरेली गेट की हालत सबसे ज्यादा जर्जर है और आए दिन इसका मलवा राहगीरों पर
गिरता रहता है। इन गेट के नीचे लगी दुकानों से पालिका टैक्स तो वसूलती है
लेकिन भवनों की मरम्मत कराने का प्रयास नहंी करती।
इसी प्रकार पीलीभीत
बारात घर के पीछे जिला पंचायत के भवन में चल रहे होमगार्ड कार्यालय की हालत
काफी नाजुक हैं। भवन की दीवारों में दरारे पड़ चुकी हैं और बरसात में यहां
पानी टपकता है। विभागीय अधिकारी कई बार भवन की मांग कर चुके हैं लेकिन
सुनवाई नहीं हो रही। कमोवेश स्टेशन रोड स्थित मूलचंद्र धर्मशाला की स्थिति
भी अच्छी नहीं है। काफी पुराने हो चुके इस भवन खतरे में।
इन जर्जर भवनों से
कभी भी बड़ी अनहोनी की आशंका है। इस बाबत जानकारी करने पर चेयरमैन प्रभात
जायसवाल ने बताया कि बरेली गेट की मरम्मत एक बार कराई गई थी। वहीं निजी
भवनों की स्थिति पर भी भवन स्वामी को नोटिस दिए जा चुके हैं।