पीलीभीत। शहर के उपाधि महाविद्यालय में आयोजित पुलिस की पाठशाला में छात्र-छात्राओं को साइबर ठगी और महिला संबंधी अपराधों से बचाव के तरीके बताए गए। आईपीएस नताशा गोयल ने छात्रों को डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन ठगी और सोशल मीडिया के दुरुपयोग से बचने की नसीहत दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस कभी वीडियो कॉल, वाट्सएप कॉल और डिजिटल अरेस्ट नहीं करती, इसलिए अनजान नंबरों व लिंक से सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
आईपीएस ने कहा कि सतर्कता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे बड़ा उपाय है। मोबाइल आज हर किसी की जरूरत बन गया है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल ठगी का कारण बन सकता है। कुछ छात्र-छात्राएं ऑनलाइन क्लास के दौरान मोबाइल पर विभिन्न एप पर आईडी बना लेते हैं। इसी कारण साइबर ठग उनके डाटा तक पहुंच जाते हैं। ठग जानकारी लेकर परिवार को कॉल कर ब्लैकमेल करते हैं। उन्होंने सलाह दी कि मोबाइल की गैलरी में जरूरी दस्तावेज या निजी तस्वीरें न रखें और किसी भी ओटीपी को किसी के साथ साझा न करें। रील्स के लाइक बढ़ाने से भी बचें। कई बार वीडियो कॉल कर साइबर अपराधी ब्लैकमेल करते हैं। डरे नहीं बल्कि परिजन और पुलिस को जरूर बताएं।
साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 और cybercrime.gov.in की जानकारी देते हुए कहा कि अगर कोई डराता या धमकाता है तो तुरंत कॉल करें और साथ ही परिजनों व पुलिस को सूचित करें। किसी भी स्थिति में ठगी का शिकार होने के 48 घंटे के अंदर शिकायत दर्ज करा दें। इससे खाता फ्रिज कर रुपये को बचाया जा सकता है। क्यूआर कोड, क्रेडिट और डेबिट कार्ड का सावधानी के साथ प्रयोग करें। घर बैठे दोगुना रुपये कमाने, आनलाइन ऑफर जैसे लिंक पर विश्वास न करें। इस मौके पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. दुष्यंत कुमार, प्रवक्ता राखी मिश्रा, दिवाकर सिंह आदि मौजूद रहे। इसके अलावा महिला अपराध से जुड़ी जानकारी देकर भी छात्राओं को जागरूक किया गया।
छात्राओं के सवालों के दिए जवाब
कार्यक्रम के दौरान छात्रा-छात्राओं ने सवाल किए। सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि अनजान नंबर से वाट्सएप पर शादी कार्ड का लिंक आने पर उसे न खोलें। लिंक ओपन करते ही साइबर अपराधी डाटा चोरी कर ठगी को अंजाम देते हैं।
छात्र-छात्राओं को सफलता के दिए सुझाव
पाठशाला के दौरान आईपीएस नताशा गोयल ने साइबर अपराध के अलावा पढ़ाई के भी जरूरी टिप्स दिए। कई छात्राओं ने सिविल सर्विस की तैयारियों को लेकर पूछा। इस पर उन्होंने जरूरी जानकारी साझा की। कहा कि सात-आठ घंटे पढ़ाई के साथ जरूरी है कि एक खेल को भी दिनचर्या में शामिल रखें। मन लगाकर नियमित पढ़ाई करें। इससे सफलता आसानी से मिल सकेगी।