पीलीभीत। पूरनपुर के घुंघचाई क्षेत्र में हरदोई ब्रांच नहर में मिले बाघिन के शव का पांच सदस्यीय पैनल ने पोस्टमार्टम किया तो कहानी ही बदल गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बाघिन के बाएं हिस्से में चेस्ट पर चोट और उसके पास खून का थक्का मिलने से पीटकर मार डालने का शक गहराया है। शक इसलिए क्योंकि रिपोर्ट में मौत का कारण साफतौर पर स्पष्ट नहीं किया गया है। इसी क्षेत्र में करीब छह माह पूर्व ग्रामीणों ने एक बाघिन को पीट-पीटकर मार डाला था। वहीं अफसर हादसे में उसकी मौत होने के तर्क देने में जुट गए हैं।
टाइगर रिजर्व के अधिकारियों द्वारा उसके सभी अंग सुरक्षित होना और शव दो से तीन पुराना होना बताया गया था। पोस्टमार्टम में एक नया तथ्य और पाया गया, वह यह कि शव बाघ का नहीं बल्कि बाघिन का है। यह बाघिन पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) की है या कहीं और की, यह अभी साफ नहीं हो पाया है। हालांकि अफसरों का कहना है कि बाघिन का शव पीछे से कहीं किसी और जंगल से नहर में बहकर आया है। कुल मिलाकर स्थानीय अफसर बाघिन की मौत को अपने जंगल में न होने को साबित करने के लिए एक दिन पूर्व से ही तर्क देने में जुटे हुए हैं।
अभी तक सामान्य मौत मानकर मामले अब पोस्टमार्टम के बाद वन अफसरों का कहना है कि उसकी मौत किसी पेड़ से टकराने, गिरने या फिर किसी वाहन से टकराने से हुई है। वन अफसरों की यदि इस बात पर यकीन किया जाए तो बाघिन चोट लगने के बाद नहर में कैसे पहुंच गई? फिलहाल इन सब कारणों से बाघिन की मौत का रहस्य खुलने की संभावना कम ही दिख रही है। कुल मिलाकर देखा जाए तो बाघिन की मौत से रहस्य का पर्दा अब केवल टाइगर रिजर्व की जांच से ही उठ सकता है।
पांच सदस्यीय पैनल ने किया पोस्टमार्टम
पोस्टमार्टम मंगलवार को महोफ रेंज में किया गया। इस दौरान मुख्य वन संरक्षक ललित कुमार वर्मा भी मौके पर पहुंच गए। फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच राजामोहन के निर्देश पर गठित पांच सदस्यीय पैनल ने बाघिन के शव का पोस्टमार्टम किया। पैनल में पीटीआर के फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच राजामोहन, आईवीआरआई बरेली के वैज्ञानिक/पशु चिकित्सक डॉ. एम करिकलन, पशु चिकित्सक डॉ. एसके राठौर, डब्ल्यूटीआई के पशुचिकित्सक डॉ. दक्ष गंगवार और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण द्वारा नामित वरिष्ठ परियोजनाधिकारी नरेश कुमार शामिल रहे।
मृत बाघिन के शव का पोस्टमार्टम पैनल द्वारा किया गया है। पोस्टमार्टम में बाघिन के शरीर के बायीं तरफ अंदरूनी चोट पाई गई है। संभवत: पेड़ से या फिर किसी वाहन के टकराने से मौत होने की संभावना है। सैंपल भेजा गया है। -नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व