एनटीसीए (नेशनल टॉइगर कंजर्वेशन अथॉर्टी) के निर्देश पर टाइगर रिजर्व में बाघ की गणना की तैयारी की जा रही है। इसके लिए वनविभाग ने शासन से 1.72 करोड़ की डिमांड भेजी है, जिसमें 1.45 करोड़ रुपये 580 कैमरों को खरीदने के लिए मांगे गए हैं।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व सहित देश के सभी टाइगर रिजर्व में बाघों की गणना इस बार एक साथ कराई जानी है। इसके लिए टाइगर रिजर्व में व्यवस्थाएं की जा रही हैं। दो चरणों में होने वाली गणना में पहले पैदल गश्त कर बाघ, वन्यजीव एवं पेड़ पौधों की गणना होगी। इसके बाद जंगल की सभी रेंजों में कैमरे लगाकर गिनती कराई जानी है। दो से तीन माह तक चलने वाली इस बाघ गणना में इस बार सबसे बड़ी दिक्कत कैमरों को लेकर आ रही है। वजह देश के सभी टाइगर रिजर्व में एक साथ गणना होना बताई जा रही है। इसलिए वन विभाग को कहीं और से कैमरों को प्राप्त करने में दिक्कत आ रही है। ऐसे में वन विभाग को अपने स्तर से कैमरे खरीदने पड़ेंगे।
टाइगर रिजर्व की सभी पांच रेंजों की 52 बीटों के लिए 750 कैमरों की जरूरत होगी। इसमें वन विभाग के पास मात्र 170 कैमरे ही उपलब्ध हैं। ऐसे में 580 नए कैमरे खरीदने होंगे। वन विभाग ने बाघ गणना के लिए कैमरे खरीदने एवं इस पर आने वाले अन्य खर्चों के लिए शासन से 1.72 करोड़ रुपये की डिमांड भेजी है। इसमें 1.45 करोड़ रुपये की धनराशि से 580 कैमरे खरीदने के लिए, जबकि 27 लाख रुपये अन्य खर्चों के लिए मांगे गए हैं। डीएफओ कैलाश प्रकाश ने बताया कि बाघ गणना की तैयारियां चल रही हैं। कैमरों की खरीद सहित विभिन्न कार्यों के लिए शासन से बजट मांगा गया है।