शहर के निकट आसाम हाइवे के किनारे तालाब पर बने भवन को प्रशासन ने ढहा
दिया। अचानक कार्रवाई करने पहुंची प्रशासनिक टीम ने भवन स्वामी को भी पुलिस
के सुपुर्द कर दिया, जिसे देर शाम को छोड़ा गया। इसको लेकर शहर में पूरे
दिन चर्चा रही।
शहर से सटे गांव नौगवां पकडिय़ा की आसाम रोड के निकट
गाटा संख्या 619 की जमीन है। इस पर दो दुकानों और उसके ऊपर एक टिनशेड का
कमरा बना है।
बुधवार को सिटी मजिस्ट्रेट जितेंद्र कुमार शर्मा के नेतृत्व
में पुलिस के साथ पहुंची प्रशासनिक टीम ने भवन में चल रही शराब भट्टी को
खाली कराकर भवन को ढहा दिया। इस दौरान यहां मौजूद भवन स्वामी को विरोध करने
पर सिटी मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में पुलिस ने पकड़ लिया और थाने भेज दिया।
सिटी
मजिस्ट्रेट ने बताया कि जिस जगह भवन बना हुआ था, वह ग्राम समाज के तालाब
के रूप में दर्ज है। इस भवन का तहसीलदार कोर्ट से गिराने का आदेश हुआ था।
इस आदेश पर भवन को गिराया गया है।
वहीं भवन स्वामी मोहन अग्रवाल का आरोप है
कि उनका भवन करीब 35 वर्ष पूर्व से बना है। इस भवन के पास की जमीन तालाब
में दर्ज है और इस पर कुछ अन्य लोगों ने कब्जा कर रखा है।
इसको लेकर
नत्थूलाल शर्मा ने दो वर्ष पूर्व हाईकोर्ट में मुकादमा दायर किया था। इस पर
हाईकोर्ट ने डीएम को तालाब से कब्जा हटाने के आदेश दिए थे, लेकिन प्रशासन
ने कब्जा नहीं हटवाया।
इस पर नत्थूलाल ने पुन: कोर्ट में अर्जी दी। इस
अर्जी पर हाईकोर्ट ने डीएम को कब्जा हटाकर दो माह में रिपोर्ट प्रस्तुत
करने के आदेश दिए थे। उनका का आरोप है कि हाईकोर्ट की अवमानना से बचने को
प्रशासन ने सत्ता पक्ष के दबाव में दूसरों पर कार्रवाई न कर उनका भवन गिरा
दिया है। वह इसे स्थानीय कोर्ट में चुनौती देगे।