पीलीभीत। होली का त्योहार नजदीक है। बाजार में दुकानें सड़क तक सज गई हैं। प्रशासन की उदासीनता के चलते अतिक्रमण फिर शुरू हो गया। सिटी मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में हाल ही में तीन-चार दिन अभियान चलाकर अतिक्रमण हटवाया गया था। मगर, उसका आम जनता को फायदा नहीं हो पाया। ट्रैफिक पुलिस के पास जाम रोकने और अतिक्रमण न होने देने का कोई प्लान नहीं है। सिस्टम बेलगाम है। इसलिए सब कुछ वैसे ही चल रहा है, जैसा चलता आया है। आम जनता भीड़ में घंटों जाम में पिस रही है।
सबको पता है कि होली का बाजार एक या डेढ़ माह पहले ही लगना शुरू हो जाता है। अब तो होली आने में 15 दिन से भी कम वक्त बचा है। मगर, प्रशासन या पुलिस ने शहर को जाम मुक्त रखने का प्लान नहीं बनाया। कुछ दिन पहले सिटी मजिस्ट्रेट अरुण कुमार के नेतृत्व में नगरपालिका ने हिम्मत करके कुछ दुकानों के आगे से अतिक्रमण हटाया था, लेकिन वह सब बेकार रहा। अब फिर से उन जगहों पर अतिक्रमण हो चुका है। सड़कों पर कोई ट्रैफिक प्लान करता नहीं दिख रहा है। शहर के स्टेशन रोड, चावला चौराहा, छिपियान मस्जिद, नींबू मंडी, किराना मंडी, अनाज मंडी, ड्रमंडगंज चौराहा के अलावा कई अन्य स्थानों पर वाहन और पैदल चलने वाले राहगीर अतिक्रमण और जाम के चलते परेशान हैं। मुख्य मार्गों पर वाहनों की पार्किंग के न तो इंतजाम है, न ही नगरपालिका का पार्किंग को लेकर कोई प्लान। नगरपालिका ने अतिक्रमण करने वालों से केवल जुर्माना वसूलने की हवा-हवाई बातें कीं, मगर उसे अमल में नहीं लाया गया। इसका नतीजा यह निकला कि दुकानें फिर से सड़क तक आ गईं।
ई-रिक्शा, आटो और टेंपो ने नरक बनाया
शहर के अंदर चलने वाले ई रिक्शा, आटो और टेंपो बेतरतीब तरीके से चलते हैं। न तो इनके मुड़ने पर रोक टोक है, न ही खड़े होने पर। ट्रैफिक पुलिस न आटो, ई रिक्शा या टैंपो चालकों को नहीं रोकती है क्योंकि उनका हिसाब-किताब पहले से ही नीचे से ऊपर तक पहुंच रहा है। बताया जाता है कि एक नेताजी ने पूरे शहर में आटो, टैंपो और ई-रिक्शा चलवाने का ठेका ले रखा है। सूत्रों के अनुसार आटो, ई रिक्शा और टैंपो की एक यूनियन बनी है। उसके माध्यम से रोजाना इनसे होने वाली वसूली उन नेताजी के पास ही पहुंच रही है। उसमें एक हिस्सा पुलिस के पास भी पहुंचता है। तभी इन आटो, टैंपो या ई रिक्शा चालकों को ट्रैफिक में मनमानी करने की पूरी छूट है।