प्रशासन ने की यात्रियों की मदद
बाद में प्रशासन की ओर से यात्रियों को सरकारी रोडवेज बसों के माध्यम से उनके गंतव्य के लिए रवाना करने की व्यवस्था की गई। हालांकि कई यात्रियों ने आरोप लगाया कि उन्होंने प्राइवेट बस संचालकों को पहले ही पूरा किराया दे दिया था। बसों से उतारे जाने के बाद उनके पास न तो अतिरिक्त पैसे बचे और न ही खाने-पीने की व्यवस्था थी। कुछ यात्रियों का कहना था कि आर्थिक तंगी के कारण वे सरकारी बस का किराया भी नहीं दे सके, जिससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
इलाके में फैल गई जंतर-मंतर जाने की अफवाह
इस बीच क्षेत्र में यह चर्चा भी फैल गई कि पकड़ी गई बसों में सवार लोग दिल्ली के जंतर-मंतर पर किसी धरना-प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे। हालांकि मौके पर मौजूद यात्रियों ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। उनका कहना था कि वे सभी दिहाड़ी मजदूर हैं और रोजी-रोटी कमाने के लिए पंजाब के लुधियाना और जालंधर जा रहे थे। उनका किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम या धरना-प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है।
एआरटीओ की कार्रवाई के बाद देर रात तक हाईवे पर यात्रियों की भीड़ लगी रही। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी बसों में सवार थे, जिन्हें वैकल्पिक व्यवस्था होने तक सड़क किनारे इंतजार करना पड़ा। घटना को लेकर यात्रियों में नाराजगी भी देखने को मिली।