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शिक्षा से ही बेटियों में बढ़ेगा आत्मविश्वास

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बिलसंडा। शिक्षा से ही बेटियों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वह निडर होकर समाज में आगे बढ़ सकेंगी। यह बात अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत कृष्णा नरेश महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. बीके सिंह ने कही। उन्होंने कहा- जब आत्मविश्वास मजबूत होगा, तभी महिलाएं-छात्राएं अपराजिता बनकर विपरीत परिस्थितियों का मुकाबला कर सकती हैं। शिक्षित होकर मुकाम हासिल किया जा सकता है। छात्राओं ने अपराजिता पोस्टर के साथ बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश देते हुए जागरूकता रैली भी निकाली।
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गौहनियां गांव कृष्णा नरेश महाविद्यालय में सोमवार को अमर उजाला अपराजिता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्राचार्य डॉ. बीके सिंह ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी सभी क्षेत्रों में है। वह ऑटो चलाने से लेकर हवाई जहाज तक उड़ा रही हैं। बेटियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। शिक्षा से ही बेटियों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वह अपराजिता बनेंगी। बेटियों किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है। आत्मविश्वास ही जीत दिलाता है। सशक्तीकरण का मतलब शक्तिशाली होना। शक्तिशाली होने के बाद बेटियां सामाजिक बुराईयों पर प्रहार करते हुए निडर होकर आगे बढ़ सकती हैं। इसके बाद छात्राओं को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश देते हुए नारी गरिमा के सम्मान की शपथ दिलाई गई। फिर छात्राओं ने जागरूकता रैली निकाली। ग्रामीणों को बेटियों को पढ़ाने के लिए जागरूक किया। इस दौरान बेटी बचाओ-बेटी बढ़ाओ पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया इसमें निशा प्रथम, दीप्ती द्वितीय और सना बी तृतीय रही। कार्यक्रम का संचालन विवेक श्रीवास्तव ने किया।
बेटा-बेटी में भेद नहीं समझना चाहिए। बेटी भी शिक्षित होकर माता पिता का नाम रोशन कर सकती हैं। आत्मविश्वास के साथ बेटी को आगे बढ़ने की सीख देना चाहिए। इससे बेटी समाज में नाम रोशन करेंगी।- अनामिका, छात्रा
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समाज में नारी गरिमा को बरकरार रखना सबकी जिम्मेदारी होती। इससे लिए बेटी को कभी कमजोर नहीं समझना चाहिए। बेटियां हर क्षेत्र में कामयाबी का परचम लहरा रहीं है। अभिभावकों को बेटियों पर गर्व करना चाहिए।
- कनक मिश्रा, छात्रा
समाज में बेटे को पढ़ना और बेटी को घर में कामों को सिखाने का चलन खत्म करना होगा। बेटियां की भी समाज में बराबर की भागीदारी है। माता-पिता बेटियों को अपराजिता बनाकर मुकाबला करने की सीख दें।
- नेहा गौतम, छात्रा
अपराजिता मुहिम से महिलाओं को जागरूक किया जा सकता है। अगर कोई भी घटना हो तो उसे छुपाने की बजाय अपने मां-बाप को जरूर बताएं। महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति खुद भी जागरूक होने की जरूरत है।
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- अनम बी, छात्रा
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