बीसलपुर। दिल्ली में निर्भया के बाद अब हैदराबाद में दुष्कर्मियों के हाथों डॉक्टर बिटिया के मारे जाने के बाद अब सख्त कानून बनाकर जल्द से जल्द सजा दी जाना चाहिए। ताकि दरिंदों के दिलों में ऐसा करने से पहले खौफ पैदा हो और वे आंख उठाकर भी न देख पाएं।
यह कहना था सफौरा स्थित जीडीएसके इंटर कालेज में अमर उजाला के ‘अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स’ कार्यक्रम में आए वक्ताओं और छात्राओं का। दिल्ली की निर्भया के बाद हैदराबाद की पशु चिकित्साधिकारी के साथ हुई जघन्य घटना से हर किसी के मन में आक्रोश दिखा। अपराजिता कार्यक्रम के तहत हुई गोष्ठी में शिक्षक-शिक्षिकाओं के अलावा बाहर से आए वक्ताओं ने भी अपने गुस्से का इजहार किया। सभी वक्ताओं का एक स्वर में कहना था कि हैदराबाद कांड सहन करने लायक नहीं है। इससे महिलाओं-किशोरियों में असुरक्षा का भाव पैदा हुआ है। सरकार पुराने कानूनों पर सख्ती से अमल कराकर हैवानों को सख्त सजा दिलाए। बेटियों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाए जाएं। बेटियां भी खुद को सशक्त बनाएं ताकि वे किसी भी परिस्थिति का मुकाबला कर सकें।
गोष्ठी में जवाहर नवोदय विद्यालय की करियर काउंसलर सोनम बेगम ने बतौर मुख्य वक्ता कहा कि जब तक महिलाओं की सुरक्षा के लिए कठोर कानून नहीं बनेगें और उनका सही से पालन नहीं होगा तब तक दिल्ली में निर्भया और हैदराबाद में डॉक्टर बिटिया जैसे कांड होते रहेंगे। महिलाएं हर क्षेत्र में काम कर रही हैं। कभी उनको ड्यूटी पर दिन में तो कभी रात में जाना पड़ता है। सरकार उनकी सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठा पा रही है। हैवानियत करने के बाद हत्यारे खुलेआम घूमते रहते हैं।
समाज भी बहिष्कार करे हैवानों का
जवाहर नवोदय विद्यालय के प्राचार्य जीएस अवस्थी ने कहा कि हैदराबाद जैसे कांड को रोकने की पहल की जानी चाहिए। हैैवान जब तक ऐसे कांड दोहराते रहेंगे तब तक महिलाएं सुरक्षित नहीं रह पाएगी। समाज ऐसे हत्यारों और राक्षसों का बहिष्कार करे। प्रवक्ता पूजा गंगवार ने कहा कि हैदराबाद जैसे कांड के आरोपियों की पैरवी वकील न करें। नेता उनको संरक्षण न दें। धर्म के नाम पर इनको संरक्षण न मिले क्योंकि ऐसे हैवानों का कोई धर्म नहीं होता। कॉलेज प्रबंधक सुरेंद्र पाल ने गोष्ठी की अध्यक्षता की। संजीव शर्मा, अरुण वर्मा और उपप्रधानाचार्य देवकी नंदन ने भी विचार रखे। संचालन मुकेश सक्सेना ने किया।