शारदा नदी के पार रमनगरा गुन्हान क्षेत्र में वन भूमि व बेनामी संपत्ति की सैकड़ों एकड़ भूमि पर खड़ी गन्ने की फसल फर्जी सट्टों के सहारे माफिया डकारने में जुटे हैं। दूसरी तरफ वन और राजस्व महकमा इस मामले में चुप्पी साधे है। इंडो नेपाल सीमा से लगे शारदा नदी के पार रमनगरा व गुन्हान इलाके में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पिलर नबर 28 के निकट लगभग 400 एकड़ कृषि भूमि बेनामी संपत्ति है। इसी के चलते राजस्व विभाग इस भूमि के पट्टे नही कर सका। कई वर्षों से अतिक्रमणकारी इस भूमि पर गन्ने की फसल पैदा कर लाखों के वारे न्यारे करते आ रहे हैं। यही नहीं रमनगरा गुन्हान इलाके में वन विभाग की भी सैकड़ो एकड़ भूमि पर गेहूं व गन्ने की फसल लहलहा रही हैं। यहां गन्ने की फसल को गन्ना माफिया फर्जी सट्टों के सहारे एलएच चीनी मील के चूका सेंटर व संपूर्णानगर के सेंटरों को सप्लाई कर रहे हैं। ऐसा भी नहीं कि इसकी भनक वन व राजस्व महकमे को न हो, लेकिन जेबें गरम होने के चलते सभी अपनी नजर फेरे हुए हैं। अभी गुन्हान व रमनगरा क्षेत्र में वन व राजस्व विभाग का संयुक्त सीमांकन भी पूरा नहीं हुआ और राजस्व विभाग ने बरसात के कार्यकाल में ही 150 पट्टे कर डाले। इस मामले में स्पष्ट आदेश हैं कि कहीं सीमा विवाद के इलाके में जब तक सीमांकन स्पष्ट न हो जाए, वहां पट्टे न किए जाएं। इसके बावजूद सारी कार्रवाई गोपनीय ढंग से कर दी गई। बताते हैं कि एक तत्कालीन एसडीएम द्वारा यह पट्टे किए गए थे। बहरहाल वन व राजस्व विभाग की लचर व्यवस्था के चलते जहां सैकड़ों एकड़ भूमि पर खड़ा गन्ना फर्जी सट्टों से सप्लाई हो रहा है। वहीं किए गए पट्टों की कार्रवाई भी संदेह के घेरे में आ गई हैं। मालूम हो कि इसी इलाके में थारू जनजाति के सैकड़ों एकड़ वन भूमि के पट्टे भी किए गए थे। जिसे वन विभाग ने शासन स्तर पर लिखापढ़ी करके पूर्व वर्षों में खारिज करा दिया था।इधर इस मामले में वन क्षेत्राधिकारी बराही अनिल शाह बताते हैं कि राजस्व विभाग ने गुन्हान में पट्टों की कार्रवाई कब और किस भूमि पर की हैं यह उनके संज्ञान में नहीं है। यदि विवादित भूमि पर काबिज लोगों के पट्टे किए गए हैं तो उनको खारिज कराया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि रमनगरा के ग्राम प्रधान के खिलाफ विभागीय केस काट दिया गया है। यदि पट्टों की कार्रवाई की गई तो तो उसकी लिखा पढ़ी की जाएगी।