लगातार बढ़ रही गर्मी से मनुष्य के साथ ही पशुओं पर भी दुष्प्रभाव पड़ रहा है। हीटवेव से स्वास्थ्य खराब होने पर उनकी मौत हो जाती है। इसके लिए पशुपालन विभाग जिले में जागरूकता अभियान चलाएगा, साथ ही गांव में तालाबों, शेड आदि की व्यवस्था भी करेगा। इसके लिए सीवीओ ने कार्य योजना तैयार की है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि भौगोलिक परिवर्तनों के कारण तापमान लगातार बढ़ रहा है जिसका प्रभाव मनुष्य और पशुओं दोनों पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि तीन या इससे अधिक दिनों तक तापमान सामान्य से अधिक होने पर इसे हीटवेव कहा जाता है। इसके कारण मनुष्य और पशु बीमार हो जाते हैं और उनकी असमय ही मौत हो जाती है। मनुष्य तो अपना इलाज करा लेते हैं लेकिन पशु अक्सर इसकी चपेट में आ जाते हैं। इसके लिए पशुपालन विभाग गांव में चौपाल, पंफ्लेट वितरण एवं अन्य माध्यमों से जागरूकता कार्यक्रम चलाएगा।
तालाबों में होगी पानी की व्यवस्था
पशुओं को हीटवेव से बचाने के लिए सभी पशु चिकित्साधिकारियों को पत्र जारी कर उनसे अपने क्षेत्र के तालाब पोखरों में पानी भरवाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पानी में रहने से पशुओं को डिहाइड्रेशन की समस्या से बचाया जा सकता है।
कैटिल शेड का निर्माण
हीटवेव से बचाने के लिए पशुओं को धूप से बचाना जरूरी है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में शेड बनवाए जाएंगे। इसके साथ ही पशुपालकों से भी अपने पशुओं को धूप से विशेषकर दिन में 12 से तीन बजे तक का बचाने और छायादार पेड़ के नीचे बांधने का अनुरोध किया जाएगा।
प्रशासन के साथ संस्थाओं से लेंगे सहयोग
पशुओं को गर्मी से बचाने के लिए विभाग अपने संसाधनों के साथ प्रशासन, स्वयं सेवी संस्थाओं एवं गैर सरकारी संस्थाओं से सहयोग मांगेगा।
यह करें उपाय
-पशुओं को पानी की व्यवस्था करें
-छाया वाले स्थानों पर ही बांधे
-धूप में चराने न ले जाएं
-पशु के असामान्य दिखने पर चिकित्क को दिखाएं
-दिन में एक बार नहलाने का प्रयास करें