पीलीभीत। अनाज उत्पादन में जनपद अग्रणी हैं। जिले में आबादी का काफी दायरा खेती पर निर्भर है, लेकिन खेती के अनुपात में कृषि वैज्ञानिकों की संख्या कम है। नतीजतन जिले के किसान प्राइवेट कंपनियों के एजेंटों और कीटनाशक विक्रेताओं पर निर्भर है। कृषि विभाग भी सिर्फ गोष्ठियां कराने तक सीमित है। किसानों की मदद धरातल पर कम कागजों में अधिक होती है। यही वजह है कि इस समय सूखा पड़ने के साथ धान की फसल में सूड़ी आदि की समस्या से किसान परेशान हैं। कुछ प्राइवेट कंपनियों की दवाइयों से कई बार स्प्रे करने के बाद भी समस्या का कोई समाधान नहीं हो पा है। इससे किसानों को कम उत्पादन का डर सताने लगा है।
जनपद में इस बार बारिश कम होने से किसानों के चेहरे मुरझाए हुए हैं। बारिश न होने से खेतों में खड़ी धान की फसल सूख रही है। किसान फसल बचाने के लिए महंगा डीजल खरीदकर पानी लगाने को विवश है। इधर, कम बारिश के चलते धान की फसल में तना छेदक सूड़ियों के साथ ही कई रोगों का प्रकोप शुरू हो गया है। इससे किसानों की नींद उड़ गई है। बीमारी एक के बाद दूसरे खेत में फैलती जा रही है। तीन से चार दिन में पूरे खेत की फसल सूख रही है। इससे किसान बेहद चिंतित हैं, लेकिन उन्हें कृषि विभाग की ओर से कोई मदद नहीं मिल पा रही है।
दवाई तो डाल रहे हैं, लेकिन नहीं हो रहा असर
कृषि विभाग के अफसर भले ही फसलों का उत्पाद बढ़ाने के लिए तमाम प्रयास करने के दावे करते हों, लेकिन धरातल पर कम कागजों में अधिक भरपाई की जाती है। यही वजह है कि कुछ प्राइवेट कंपनियों के एजेंट दवाइयों के फायदे का हवाला देकर किसानों को लूट रहे है। नतीजतन कई बार स्प्रे करने के बाद फसलों से बीमारी की समस्या दूर नहीं हो रही है।
बोले किसान
मैंने 12 एकड़ में धान लगाया है। रोपाई के बाद धान में चार बार स्प्रे कर चुका हूं, लेकिन पूरी तरह से सूड़ी नहीं मरी है। जिले में सरकारी दुकानों का अता-पता तक नहीं है न ही कृषि अफसरों से कोई ठोस जानकारी मिल रही हैं।
- जसवंत सिंह, किसान
मैंने दो एकड़ में धान लगाया है। इसमें पांच बार कीटनाशक का स्प्रे कर चुका हूं, बावजूद इसके धान में कीड़े मकोड़े नहीं मर है। इस स्थिति में कैसे धान की फसल का उत्पाद बढ़ेगा।
- धर्मपाल, किसान
बढ़नी चाहिए कृषि वैज्ञानिकों की संख्या
किसान नेता मंजीत सिंह ने कहा कि जिले की बड़ा दायरा खेती पर निर्भर है, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि जिले में खेती के अनुपात में कृषि वैज्ञानिकों की संख्या कम है। इसलिए किसान प्राइवेट कंपनियों के एजेंट और कीटनाशक विक्रेता पर निर्भर हैं।
धान की फसल में सूड़ी की बढ़ती समस्या को देखते हुए कृषि रक्षा अधिकारी की ओर से किसानों को जागरूक करने के साथ ही दवाइयों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। इस बीमारी से बचाव के लिए फसल में पानी की कमी न होने दें।
- विनोद कुमार याद, जिला कृषि अधिकारी