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तीसरे साल भी नहीं बढ़ा गन्ना मूल्य, किसान हताश

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पीलीभीत। गन्ने के दामों में बढ़ोतरी की आस लगाए बैठे किसानों को इस बार भी निराश होना पड़ा। किसानों को मौजूदा पेराई सत्र में भी गन्ने का वही भाव मिलेगा, जो लगातार पिछले तीन सालों से मिलता रहा है। हालांकि गन्ना किसानों को उम्मीद थी कि बढ़ती महंगाई के चलते सरकार इस बार दाम 400 रुपये प्रति क्विंटल करेगी। गन्ना मूल्य न बढ़ाए जाने से किसानों में रोष है।
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कृषि प्रधान जिले में करीब एक लाख हेक्टेयर रकबे में गन्ने की पैदावार की जाती है। वहीं 1.92 लाख गन्ना किसान है। कोरोना महामारी का कृषि क्षेत्र पर तो कोई असर नहीं रहा, मगर चीनी मिलों की ओर से गन्ना बकाया भुगतान को लेकर की गई लेटलतीफी किसानों को कर्जदार बना रही है। वहीं डीजल और उर्वरकों के बढ़ते दामों से फसलों की लागत भी बढ़ गई है। ऐसे में किसान संगठन सरकार से गन्ने के दाम 400 प्रति क्विंटल करते आ रहे थे। रविवार की देर रात राज्य मंत्रिपरिषद ने राज्य परामर्शी मूल्य (गन्ना मूल्य) न बढ़ाने को मंजूरी दे दी। यानी यह लगातार चौथा पेराई सत्र है जब गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य नहीं बढ़ाया गया है। इस बार गन्ना किसानों को गन्ने की सामान्य प्रजाति के गन्ने के लिए 315 और अगैती प्रजाति के लिए 325 रुपये प्रति क्विंटल का ही भाव मिलेगा। हालांकि अब मौजूदा पेराई सत्र समाप्ति की ओर बढ़ रहा है ज्यादातर मिलों में गन्ने की अधिकांश पेराई हो चुकी है। सरकार यदि गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य बढ़ाती तो फिर चीनी मिलों को किसानों को बढ़े हुए गन्ना मूल्य के हिसाब से एरियर भी देना पड़ता। ऐसे में अब किसानों को अब अगले पेराई सत्र का ही इंतजार रहेगा। इधर, गन्ना मूल्य न बढ़ने से गन्ना किसान काफी खफा हैं। उनका कहना है कि गन्ने की खेती अब घाटे का सौदा होती जा रही है। सूबे में योगी सरकार के आने के बाद गन्ना के मूल्य में सिर्फ 2017-18 के सीजन में 10 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया गया था। इसके बाद से कोई कीमत नहीं बढ़ाई गई है।
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इस संबंध में जब जिला गन्ना अधिकारी जितेंद्र मिश्र से जानकारी की गई तो उन्होंने मामले में अभी कोई नोटिफिकेशन न मिलने की बात कही है।
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