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Pilibhit News: 65 साल बाद पुनर्वास की प्रक्रिया तेज, विस्थापितों के लिए जमीन तलाशेगा प्रशासन

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पूरनपुर। नानकसागर डैम निर्माण के दौरान वर्ष 1961 में विस्थापित हुए 144 परिवारों के पुनर्वास की कवायद प्रशासनिक स्तर पर फिर तेज हाे गई है। दशकों से जमीन पर मालिकाना हक और स्थायी पुनर्वास की मांग कर रहे विस्थापित परिवारों को बसाने के लिए बृहस्पतिवार को हुई बैठक में जमीन तलाशने का निर्णय लिया गया। मंडलायुक्त भूपेंद्र एस. चौधरी ने लखीमपुर खीरी के संपूर्णानगर चीनी मिल परिसर में पीलीभीत और खीरी जिले के अधिकारियों के साथ बैठक कर पुनर्वास प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।
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उत्तराखंड में नानकसागर डैम बनने के समय उत्तराखंड राज्य नहीं बना था। नानकसागर डैम उत्तर प्रदेश में था। नानकसागर डैम बनने के दौरान प्रभावित 144 परिवारों को वर्ष 1961 में हजारा क्षेत्र के टाटरगंज और बमनपुर भागीरथ गांव में वन विभाग की जमीन पर बसाया गया था। यह क्षेत्र बाढ़ प्रभावित होने के कारण समय के साथ अधिकांश परिवार उधम सिंह नगर, लखीमपुर, सीतापुर और अन्य जिलों में जाकर बस गए, जबकि कुछ परिवार आज भी वहीं रहकर खेती कर रहे हैं।
विस्थापितों को बसाने के लिए वन विभाग की जमीन सिंचाई विभाग और फिर राजस्व विभाग को हस्तांतरित होनी थी, लेकिन सेंचुरी क्षेत्र में आने के कारण यह प्रक्रिया अधूरी रह गई। अधिकारियों के चक्कर लगाने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां से निर्देश दिए गए। इसके बाद मंडलायुक्त की अध्यक्षता में समिति गठित की गई। मंडलायुक्त कार्यालय से 101 प्रत्यावेदन पूरनपुर तहसील भेजे गए थे। इनमें 45 वारिसानों ने अपना दावा प्रस्तुत किया। 47 पत्रावलियों का निस्तारण कर रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। संवाद
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