पीलीभीत। होली का त्योहार नजदीक आते ही मुनाफे के चक्कर में खाद्य तेलों में जमकर मिलावट की जाने लगी है। प्रति लीटर दस के बजाए पचास रुपये मुनाफे के लिए वे बाजार में नेपाली तेल भी खपा रहे हैं। शहर की मंडी के गोदामों में मिलावटी और नेपाली तेल के अलावा पॉम ऑयल भरा पड़ा है। रिफाइंड या शुद्ध सरसों जैसा दिखने वाला यह मिलावटी तेल से लोगों को होली के मौके पर खुद ही होशियार रहना होगा। क्योंकि सब कुछ जानते हुए भी एफएसडीए टीम खामोश है।
होली का त्योहार नजदीक आते ही बाजार में शुद्ध सरसों के नाम पर माफियाओं ने पॉम ऑयल, प्रतिबंधित नेपाली तेल, राइस ब्रान, सोया ऑयल समेत अन्य तरह के मिलावटी तेल का मोटा स्टाक गोदामों में जमा कर लिया है। इसमें खुशबू वाले रंगों की मिलावट कर शुद्ध बताकर बेचा जा रहा है। आम नागरिकों को पूरे पैसे चुकाने के बाद भी त्योहारी सीजन में मिलावटी तेल नसीब हो रहा है। माफिया ने ब्रांडेड के नाम पर एक या दो लीटर की बंद बोतलों के अलावा पांच लीटर के डिब्बों और 15 से 16 लीटर के पीपों में मिलावटी तेल का स्टाक जमा कर रखा है। शादियों में इसका खूब इस्तेमाल हो रहा है। एफएसडीए तो छापा मारने के नाम पर इक्का दुक्का नमूने भरकर मामले निपटा रहा है।
पॉम ऑयल और नेपाली तेल बाजार में थोक रेट में 45 रुपये लीटर के हिसाब से उपलब्ध है। फुटकर में इसे 60 से 75 रुपये प्रति लीटर बिक्री किया जा रहा है। शुद्ध सरसों के तेल की कीमत 110 से 115 रुपये प्रति लीटर है। काली और पीली दोनों तरह की सरसों के तेल के रेट इसी के आसपास अलग-अलग हैं। सील बंद डिब्बे, प्लास्टिक की बोतल या पैकेट में मिलावटी तेल 40 फीसदी कम दामों में मिलने से इसे गरीब और मध्य वर्ग के परिवार बड़ी मात्रा में खरीदकर अपनी सेहत से जाने-अनजाने में खिलवाड़ रहे हैं क्योंकि बहुत से परिवारों को नहीं पता कि मिलावटी तेल खाने से सेहत को क्या नुकसान हैं। बाजार में सोया ऑयल का तेल 60 से 65 रुपये प्रति लीटर उपलब्ध है। माफिया ने त्योहारी और शादियों के सीजन के समय मिलावटी तेल के स्टाक से बाजार को पाट दिया है। शहर के बड़े बाजारों में भारी भरकम गोदाम मिलावटी तेल से भरे पड़े हैं। उनसे बड़ी दुकानों से लेकर गली मोहल्लों में चलने वाली छोटी दुकानों पर इसकी सप्लाई जोरों पर है।
पीले रंग और खुशबू के सेंट का इस्तेमाल
मिलावटी सरसों के तेल को शुद्ध दिखाने के लिए मिलावटखोर थोड़ा सा सरसों का तेल लेकर उसमें पॉम ऑयल या नेपाली तेल मिलाते हैं। फिर उसमें हल्का पीला रंग डालते हैं। खुशबू के लिए सेंट का इस्तेमाल किया जाता है। इसके पीछे वजह यह होती है कि ग्राहक को शुद्ध सरसों के तेल जैसी खुशबू आए और मिलावट का शक न हो।
शुद्ध और मिलावटी तेल कीमत में बहुत है अंतर
शुद्ध सरसों का तेल 115 से 120 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बिकता है जबकि किराना दुकानों पर मिलावटी या नेपाली तेल बेहतरीन पैकिंग में 70 रुपये से 75 रुपये प्रति लीटर में बंद बोतल में मिल जाएगा। कभी-कभी कुछ दुकानदार शुद्ध सरसों और मिलावटी तेल के रेट एक समान भी रखते हैं, ताकि ग्राहक को शक न हो और वे महंगे में ही सस्ता मिलावटी तेल ले जाते हैं।
दिल, फेफड़े, किडनी और लिवर पर पड़ता है असर
फिजिशियन डॉ. प्रमोद अग्रवाल का कहना है कि नेपाली या मिलावटी तेल के लगातार सेवन से व्यक्ति को दिल, लिवर, किडनी और फेफड़ों पर असर पड़ता है। अगर इनमें से एक में भी दिक्कत हो जाए तो अन्य बीमारियां भी घेर लेती हैं। मिलावटी या नेपाली तेल खाने से किडनी खराब हो सकती है। अपच की बीमारी हो सकती है। पेट में एसिडिटी बनती रहती है। इससे अनावश्यक वजन बढ़ने लगता है। फिर ब्लड प्रेशर, शुगर जैसी अन्य घातक बीमारियां घेर लेती हैं। लगातार मिलावटी तेल या अन्य खाद्य पदार्थ खाने से व्यक्ति बीमारियों से घिरता चला जाता है। घातक रंगों के प्रयोग से किडनी में पथरी बन सकती है। रसायन मिला होने से हार्ट और आंत को नुकसान होता है। मिलावटी तेल प्रयोग करने से गर्भस्थ शशु का जीवन संकट में पड़ जाता है। बच्चों का मानसिक विकास प्रभावित होता है।
ऐसे करें मिलावटी तेल की पहचान
हाथ साफ करके तेल की मालिश करें, अगर त्वचा पर तेल रंग छोड़े तो मिलावट है।
तेल को फ्रिज में रखने पर वह जम जाए तो समझो मिलावटी है।
मिलावटी तेल को गर्म करने पर उससे निकलने वाली गैस से खाना बनाते व्यक्ति को चक्कर आने जैसी स्थिति बन जाती है।
इस तेल में पकाए गए भोजन से एसिडिटी बनने लगती है। एक बार खाने से लंबे समय तक भूख नहीं लगती।
बरेली से नेपाली तेल की भी सप्लाई
बरेली की श्यामगंज मंडी में नेपाली तेल का बड़े पैमाने पर भंडार है। वहां से यह तेल कुछ व्यापारी कम रेट पर पीलीभीत की मंडी में भी मंगवा रहे हैं। बरेली से बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित नेपाली तेल का स्टाक कर लिया गया है। उसे होली के त्योहार और शादी बरातों में सप्लाई करने का काम चल रहा है। सस्ते के चक्कर में बड़े पैमाने पर इस तरह का तेल खरीदकर आम नागरिक जाने-अनजाने अपने परिवार में बीमारियों को आमंत्रित कर रहे हैं। सरकारी सिस्टम हमेशा की तरह मिलावटी कारोबार को खामोश होकर अपना मौन समर्थन दे रहा है।
सरसों के तेल में मिलावट की शिकायत पर पिछले सप्ताह दुकानों पर छापे मारे गए थे। कुछ दुकानों से सैंपल भी लिए गए हैं। फिलहाल अभी बाजार में मिलावटी तेल का बड़ा मामला नहीं सामने आया है। - शशांक त्रिपाठी, अभिहित अधिकारी, एफएसडीए