पीलीभीत। महंगाई के दौर में कीमत भले ही कितनी चुकाओ, मगर शुद्धता की कोई गारंटी नहीं। त्योहारी सीजन में तो खाने पीने वाली चीजों में मिलावट और भी ज्यादा होने लगती है क्योंकि तब बाजार में मांग बढ़ जाती है। अब नवरात्र, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहार आने वाले हैं। ऐसे में मिलावटखोर एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। त्योहार के चंद दिनों में मोटा मुनाफा कमाने के लिए मिलावटखोरी का खेल फिर शुरू हो चुका है। त्योहारों में समझो एक तरह से एफएसडीए का भी सीजन आ गया है। हर साल त्योहारों पर एफएसडीए की कार्रवाई छोटे मोटे मिलावटखोरों तक सीमित रहती है। बड़े व्यापारी सांठगांठ से बच जाते हैं।
खाद्य पदार्थों में मिलावट का मामला सीधे आम आदमी के सेहत से जुड़ा है। शासन-प्रशासन इस बारे में तमाम दिशा निर्देश जारी करता है। इसकी निगरानी के लिए फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन टीम भी है। एफएसडीए अफसरों को बाजार में खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी रोकने और आम जनता में उसके उसके प्रति जागरूकता पैदा करने की जिम्मेदारी दी गई है, मगर धरातल पर एफएसडीए की कार्रवाई हमेशा केवल कागजी आंकड़े दुरुस्त करती है। बड़े मिलावटखोर अपना काम करते हुए त्योहारी सीजन का पूरा फायदा उठाते हैं। त्योहारी सीजन आते ही बाजार में एक बार फिर से तेल, मसाले, दाल, दूध, रिफाइंड, बिस्कुट, सूखे मेवा, खोवा, मिठाई में मिलावट बड़े पैमाने पर शुरू हो चुकी है। अक्तूबर से नवंबर तक नवरात्र, दशहरा, दीवाली जैसे त्योहारों पर मिलावटखोरी बढ़ेगी। उसी के साथ इन त्योहारों पर एफएसडीए की ऊपरी कमाई में भी बढ़ोतरी होनी तय है।
बड़े धंधेबाजों पर मेहरबानी, छोटों पर निशाना
मिलावटखोरी रोकने के लिए प्रशासन की सख्ती हर साल होती है। इस बार अभी सख्ती शुरू नहीं हुई है, मगर हर साल एफएसडीए की सख्ती कागजों में ही दिखती है। बीते साल भी एफएसडीए टीम ने दूधिया, छोटे किराना व्यापारी, सड़क किनारे या फिर गांव देहात में मिठाई की छोटी दुकान लगाने वालों पर कार्रवाई करके अपने आंकड़े दुरुस्त कर लिए थे। एफएसडीए टीम ने मिलावटखोरी करने वाले बड़े धंधेबाजों पर कहीं हाथ नहीं डाला था। बड़ी दुकानों, शोरूम या शॉपिंग मॉल पर छापा ही नहीं मारा गया। अगर टीम बहुत दबाव में पहुंच भी गई तो उन्हें क्लीन चिट मिल गई या फिर चेतावनी नोटिस देकर निपटा दिया।
होली पर अधिकतर नमूने हुए थे फेल
खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी किस कदर हावी है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि होली पर लिए गए 50 से अधिक नमूनों में अधिकतर फेल हो गए थे, इनमें सरसों का तेल, पापड़, मैक्रोनी, मिठाई, दूध समेत अन्य खाद पदार्थ शामिल थे, मगर इनमें अधिकांश छूट गए। लैब की जांच रिपोर्ट भी देर से आई।
नामचीन होटलों में बिना जांच बता देते हैं शुद्धता
शहर के नामचीन होटल और रेस्त्रां में कई बार ग्राहकों का सामान खराब निकलने पर कहासुनी थानों तक भी पहुंची। अधिकारियों के निर्देश पर कुछ होटलों से पनीर और सब्जियों के नमूने भी लिए गए। वह अधोमानक भी निकले, मगर इसके बावजूद ज्यादातर पर कार्रवाई नहीं हुई। कुछ नामचीन होटलों में एफएसडीए टीम गई ही नहीं। एक दो होटलों में पहुंची तो बिना खाद्य पदार्थों की जांच कराए ही शुद्ध बता डाला।
यह बात सही है कि कोरोना काल में लंबे समय तक मिलावट के सामानों पर छापे नहीं मारे गए, मगर बीते 15 दिन से दो दर्जन से अधिक दुकानों पर छापे मारे गए हैं। 14 सैंपल भी जांच को भेजे हैं। त्योहारों पर शासन की गाइड लाइन का इंतजार है। - शशांक त्रिपाठी, अभिहीत अधिकारी, एफएसडीए
इन इलाकों में मिलावट की शिकायतें
शहर के रंगीलाल चौराहा, किराना मंडी, गांधी स्टेडियम रोड, सुनगढ़ी, गौहनिया चौराहा, बरहा, चौक बाजार, मदीनाशाह, बेलो चौराहा, पंजाबियान, लोहा मंडी के अलावा बरखेड़ा, बीसलपुर, पूरनपुर, जहानाबाद, अमरिया, गजरौला, बिलसंडा, सेहरामऊ, माधोटांडा में खाद्य पदार्थों में मिलावट की सबसे ज्यादा शिकायतें हैं, मगर एफएसडीए टीम केवल त्योहारी सीजन में ही चेक करने निकलती है।
आटा में सेलखड़ी, दूध में अरारोट की मिलावट
खाद्य पदार्थों में होने वाली मिलावट कई तरीके की है। घी में वनस्पति, मक्खन में मार्जरीन, आटा में सेलखड़ी पाउडर, पिसी हल्दी में पीली मिट्टी रंग, काली मिर्च में पपीते के बीज, कटी सुपारी में छुआरे की गुठली, दूध में अरारोट, सपरेटा पाउडर, मावा में उबले आलू और शकरकंद मिलावट की जाती है। दूध में शुद्धता के नाम पर सपरेटा मिलाकर बेचा जाता है। अनाज खासतौर से दालों में कंकड़, अरहर की दाल में चने और खेसारी की दाल, शरबत में सकरीन, लाल मिर्च में ईंट पाउडर, हल्दी पाउडर में मेटानिल यलो नामक रसायन (डॉक्टरों के अनुसार इनसे कैंसर भी बन सकता है।) दालचीनी में अमरूद की छाल की मिलावट है। प्लास्टिक और आलू से बने चावल भी बाजार में बिक रहे हैं। इनमें हानिकारक रसायनों का प्रयोग होता है।
लीवर-किडनी पर भी होगा असर
मिलावटी खाद्य पदार्थ में हानिकारक केमिकलों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में मिलावटी खाद्य पदार्थ का सेवन उल्टी, दस्त समेत कई पेट संबंधी बीमारियां पैदा कर सकता है। इसका सबसे ज्यादा असर लीवर और किडनी पर पड़ता है। मिलावट का यह जहर स्वास्थ्य पर कहर बनकर टूटता है। - डॉ. आदित्य पांडेय, फिजीशियन
मिलावटखोरी पर एक साल की कार्रवाई का ब्योरा
निरीक्षण- 1088
छापा- 229
संग्रहित नमूने- 229
प्राप्त नमूनों की जांच रिपोर्ट - 224
अधोमानक - 48
असुरक्षित - 6
मिथ्याछाप - 40
मानक विरुद्ध - 94
दायर वादों की संख्या - 65