बरेली-पीलीभीत हाइवे पर अज्ञात वाहन की टक्कर से शहर के मोहल्ला नखासा निवासी एडीओ (आईएसबी) 55 वर्षीय वीरेंद्रपाल वर्मा की मौके पर ही मौत हो गई। वह बरेली जिले के रामनगर ब्लॉक में तैनात थे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को जिला अस्पताल भिजवाया। एडीओ की मौत की जानकारी पर तमाम लोग जिला अस्पताल पहुंच गए। लोग रोते-विलखते परिवार वालों को ढांढस बंधाते रहे।
मोहल्ला नखासा निवासी अमित वर्मा ने बताया कि उनके पिता बरेली के भदपरा ब्लॉक में ग्राम्य विकास अधिकारी थे। करीब दो महीना पहले विभाग ने एडीओ (आईएसबी) के पद पर पदोन्नत करके उन्हें आंवला के रामनगर ब्लॉक में तैनात कर दिया था। सोमवार सुबह करीब सात बजे वह ब्लॉक जाने के लिए बाइक से घर से निकले थे। बरेली हाइवे पर थाना जहानाबाद क्षेत्र में खमरिया पुल के पास किसी वाहन ने बाइक में टक्कर मार दी। इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। उनका हेलमेट भी बुरी तरह चकनाचूर हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने उन्हें एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेजा। जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे की खबर मिलने पर परिवार में कोहराम मच गया। रोते-विलखते परिवार वाले जिला अस्पताल पहुंचे। तमाम शुभचिंतकों की अस्पताल में भीड़ जमा हो गई। लोग विलख रहे परिवार वालों को ढांढस बंधाते रहे। पोस्टमार्टम के बाद शाम को मुक्तिधाम पर उनकी अंत्येष्टि कर दी गई। अंतिम यात्रा में सतनाम सिंह, रविंद्रपाल सिंह, इंडियन बैंक के शाखा प्रबंधक एसएस राना, ग्राम पंचायत शाहगढ़ के प्रधान सुखविंदर सिंह उर्फ सीटू सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
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चार भाइयों में सबसे बड़े थे वीरेंद्र
मोहल्ला नखासा निवासी एडीओ (आईएसबी) वीरेंद्रपाल चार भाइयों में सबसे बड़े थे। उनके छोटे भाई विजय वर्मा व्यापारी हैं, जबकि उनसे छोटे अजय वर्मा डेयरी का काम करते हैं। सबसे छोटे भाई नरेश वर्मा इंडियन बैंक की गांधी स्टेडियम रोड शाखा में कार्यरत हैं।
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बेटे का शव देख बदहवास हो गई बूढ़ी मां
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सड़क हादसे में एडीओ वीरेंद्रपाल वर्मा की मौत की जानकारी मिलने पर उनकी 75 वर्षीय मां अनूपी देवी बदहवास हो गईं। उन्हें तो पहले यकीन ही नहीं हुआ। बोलीं, मेरा लाल मुझे छोड़ कर नहीं जा सकता। पोस्टमार्टम के बाद जब शव घर पहुंचा तो बेटे का शव देख वह फफक कर रो पड़ीं। वीरेंद्र की पत्नी बिंदू वर्मा का भी रो-रोकर बुरा हाल था।
मिलनसार स्वभाव के थे वीरेंद्र
सड़क दुर्घटना में मारे गए मोहल्ला नखासा निवासी एडीओ वीरेंद्रपाल वर्मा हंसमुख और काफी मिलनसार व्यक्त्तिव के थे। मोहल्ले से लेकर उनके विभागीय साथी भी उनसे काफी लगाव रखते थे। शायद यही वजह रही कि उनकी मौत की जानकारी जब लोगों को हुई तो तमाम लोग जिला अस्पताल पहुंच गए।